23 अक्टूबर 2025 को मेलबर्न का पंचांग

गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (04:17, 24 अक्टू॰ तक), नक्षत्र स्वाति (07:21 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:24 पर और सूर्यास्त 19:45 पर है। राहुकाल 14:44 से 16:25 तक है।

दिन और रात
दिन 06:24 – 19:45
रात 06:23 तक
तिथि
द्वितीया, 04:17 तक
तृतीया
नक्षत्र
विशाखा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 04:17, 24 अक्टू॰ तक
शुक्ल तृतीया 06:50, 25 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 07:21 तक
विशाखा 10:21, 24 अक्टू॰ तक
योग
प्रीति 09:35 तक
आयुष्मान 10:29, 24 अक्टू॰ तक
करण
बालव 15:01 तक
कौलव 04:17, 24 अक्टू॰ तक
तैतिल 17:33, 24 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
तुला 03:36, 24 अक्टू॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:24
सूर्यास्त
19:45
चंद्रोदय
06:49
चंद्रास्त
21:36
दिनमान
13h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:59 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
12:38 – 13:31

अशुभ समय

राहुकाल
14:44 – 16:25
यमगंड
06:24 – 08:04
गुलिक काल
09:44 – 11:24

23 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:24 – 08:04शुभ
रोग08:04 – 09:44टालें
उद्वेग09:44 – 11:24टालें
चर11:24 – 13:04सामान्य
लाभ13:04 – 14:44शुभ
अमृत14:44 – 16:25शुभ
काल16:25 – 18:05टालें
शुभ18:05 – 19:45शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:45 – 21:05शुभ
चर21:05 – 22:24सामान्य
रोग22:24 – 23:44टालें
काल23:44 – 01:04टालें
लाभ01:04 – 02:23शुभ
उद्वेग02:23 – 03:43टालें
शुभ03:43 – 05:03शुभ
अमृत05:03 – 06:23शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:2407:31दिन
मंगल07:3108:37दिन
सूर्य08:3709:44दिन
शुक्र09:4410:51दिन
बुध10:5111:58दिन
चंद्र11:5813:04दिन
शनि13:0414:11दिन
गुरु14:1115:18दिन
मंगल15:1816:25दिन
सूर्य16:2517:31दिन
शुक्र17:3118:38दिन
बुध18:3819:45दिन
चंद्र19:4520:38रात
शनि20:3821:31रात
गुरु21:3122:24रात
मंगल22:2423:17रात
सूर्य23:1700:11रात
शुक्र00:1101:04रात
बुध01:0401:57रात
चंद्र01:5702:50रात
शनि02:5003:43रात
गुरु03:4304:36रात
मंगल04:3605:29रात
सूर्य05:2906:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
9 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2176° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।