6 अक्टूबर 2026 को मेलबर्न का पंचांग

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (07:37 तक), नक्षत्र आश्लेषा (03:47, 7 अक्टू॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:48 पर और सूर्यास्त 19:28 पर है। राहुकाल 16:18 से 17:53 तक है।

दिन और रात
दिन 06:48 – 19:28
रात 06:47 तक
तिथि
एकादशी, 06:04 तक
नक्षत्र
आश्लेषा, 03:47 तक
मघा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण दशमी 07:37 तक
कृष्ण एकादशी 06:04, 7 अक्टू॰ तक
कृष्ण द्वादशी 04:47, 8 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
आश्लेषा 03:47, 7 अक्टू॰ तक
मघा 03:10, 8 अक्टू॰ तक
योग
सिद्ध 12:50 तक
साध्य 10:30, 7 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:37 तक
बव 18:49 तक
बालव 06:04, 7 अक्टू॰ तक
कौलव 17:23, 7 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 03:47, 7 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:48
सूर्यास्त
19:28
चंद्रोदय
04:20
चंद्रास्त
14:43
दिनमान
12h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:17 – 06:03
अभिजीत मुहूर्त
12:43 – 13:34

अशुभ समय

राहुकाल
16:18 – 17:53
यमगंड
09:58 – 11:33
गुलिक काल
13:08 – 14:43

6 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:48 – 08:23टालें
उद्वेग08:23 – 09:58टालें
चर09:58 – 11:33सामान्य
लाभ11:33 – 13:08शुभ
अमृत13:08 – 14:43शुभ
काल14:43 – 16:18टालें
शुभ16:18 – 17:53शुभ
रोग17:53 – 19:28टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:28 – 20:53टालें
लाभ20:53 – 22:18शुभ
उद्वेग22:18 – 23:43टालें
शुभ23:43 – 01:07शुभ
अमृत01:07 – 02:32शुभ
चर02:32 – 03:57सामान्य
रोग03:57 – 05:22टालें
काल05:22 – 06:47टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:4807:52दिन
सूर्य07:5208:55दिन
शुक्र08:5509:58दिन
बुध09:5811:02दिन
चंद्र11:0212:05दिन
शनि12:0513:08दिन
गुरु13:0814:12दिन
मंगल14:1215:15दिन
सूर्य15:1516:18दिन
शुक्र16:1817:22दिन
बुध17:2218:25दिन
चंद्र18:2519:28दिन
शनि19:2820:25रात
गुरु20:2521:21रात
मंगल21:2122:18रात
सूर्य22:1823:14रात
शुक्र23:1400:11रात
बुध00:1101:07रात
चंद्र01:0702:04रात
शनि02:0403:01रात
गुरु03:0103:57रात
मंगल03:5704:54रात
सूर्य04:5405:50रात
शुक्र05:5006:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
18 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2309° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।