11 नवंबर 2026 को मेलबर्न का पंचांग

बुधवार, 11 नवंबर 2026, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

बुधवार, 11 नवंबर 2026 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (21:23 तक), नक्षत्र अनुराधा (17:08 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:03 पर और सूर्यास्त 20:05 पर है। राहुकाल 13:04 से 14:49 तक है।

दिन और रात
दिन 06:03 – 20:05
रात 06:02 तक
तिथि
द्वितीया, 21:23 तक
तृतीया
नक्षत्र
अनुराधा, 17:08 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 नवंबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 21:23 तक
शुक्ल तृतीया 23:39, 12 नव॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 19:49, 12 नव॰ तक
योग
शोभन 08:39 तक
अतिगंडअशुभ 09:10, 12 नव॰ तक
करण
बालव 08:24 तक
कौलव 21:23 तक
तैतिल 10:29, 12 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:03
सूर्यास्त
20:05
चंद्रोदय
06:42
चंद्रास्त
22:16
दिनमान
14h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:43 – 05:23
अभिजीत मुहूर्त
12:36 – 13:32 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:04 – 14:49
यमगंड
07:48 – 09:33
गुलिक काल
11:19 – 13:04

11 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:03 – 07:48शुभ
अमृत07:48 – 09:33शुभ
काल09:33 – 11:19टालें
शुभ11:19 – 13:04शुभ
रोग13:04 – 14:49टालें
उद्वेग14:49 – 16:34टालें
चर16:34 – 18:20सामान्य
लाभ18:20 – 20:05शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग20:05 – 21:19टालें
शुभ21:19 – 22:34शुभ
अमृत22:34 – 23:49शुभ
चर23:49 – 01:03सामान्य
रोग01:03 – 02:18टालें
काल02:18 – 03:33टालें
लाभ03:33 – 04:48शुभ
उद्वेग04:48 – 06:02टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0307:13दिन
चंद्र07:1308:23दिन
शनि08:2309:33दिन
गुरु09:3310:44दिन
मंगल10:4411:54दिन
सूर्य11:5413:04दिन
शुक्र13:0414:14दिन
बुध14:1415:24दिन
चंद्र15:2416:34दिन
शनि16:3417:44दिन
गुरु17:4418:55दिन
मंगल18:5520:05दिन
सूर्य20:0520:55रात
शुक्र20:5521:44रात
बुध21:4422:34रात
चंद्र22:3423:24रात
शनि23:2400:14रात
गुरु00:1401:03रात
मंगल01:0301:53रात
सूर्य01:5302:43रात
शुक्र02:4303:33रात
बुध03:3304:23रात
चंद्र04:2305:12रात
शनि05:1206:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
28 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2323° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।