24 नवंबर 2026 को मेलबर्न का पंचांग

मंगलवार, 24 नवंबर 2026, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (01:53, 25 नव॰ तक), नक्षत्र भरणी (07:32 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 20:19 पर है। राहुकाल 16:43 से 18:31 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 20:19
रात 05:54 तक
तिथि
पूर्णिमा, 01:53 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
कृत्तिका, 04:55 तक
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 नवंबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
पूर्णिमा 01:53, 25 नव॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 22:20, 25 नव॰ तक
नक्षत्र
भरणी 07:32 तक
कृत्तिका 04:55, 25 नव॰ तक
रोहिणी 02:06, 26 नव॰ तक
योग
परिघअशुभ 21:35 तक
शिव 17:29, 25 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:35 तक
बव 01:53, 25 नव॰ तक
बालव 12:08, 25 नव॰ तक
चंद्र राशि
मेष 12:54 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
20:19
चंद्रोदय
20:13
चंद्रास्त
04:55
दिनमान
14h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:37 – 05:16
अभिजीत मुहूर्त
12:38 – 13:35

अशुभ समय

राहुकाल
16:43 – 18:31
यमगंड
09:30 – 11:18
गुलिक काल
13:06 – 14:55

24 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:54 – 07:42टालें
उद्वेग07:42 – 09:30टालें
चर09:30 – 11:18सामान्य
लाभ11:18 – 13:06शुभ
अमृत13:06 – 14:55शुभ
काल14:55 – 16:43टालें
शुभ16:43 – 18:31शुभ
रोग18:31 – 20:19टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल20:19 – 21:31टालें
लाभ21:31 – 22:42शुभ
उद्वेग22:42 – 23:54टालें
शुभ23:54 – 01:06शुभ
अमृत01:06 – 02:18शुभ
चर02:18 – 03:30सामान्य
रोग03:30 – 04:42टालें
काल04:42 – 05:54टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5407:06दिन
सूर्य07:0608:18दिन
शुक्र08:1809:30दिन
बुध09:3010:42दिन
चंद्र10:4211:54दिन
शनि11:5413:06दिन
गुरु13:0614:18दिन
मंगल14:1815:31दिन
सूर्य15:3116:43दिन
शुक्र16:4317:55दिन
बुध17:5519:07दिन
चंद्र19:0720:19दिन
शनि20:1921:07रात
गुरु21:0721:55रात
मंगल21:5522:42रात
सूर्य22:4223:30रात
शुक्र23:3000:18रात
बुध00:1801:06रात
चंद्र01:0601:54रात
शनि01:5402:42रात
गुरु02:4203:30रात
मंगल03:3004:18रात
सूर्य04:1805:06रात
शुक्र05:0605:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
28 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
13 दिस॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2328° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।