20 अक्टूबर 2027 को मेलबर्न का पंचांग

बुधवार, 20 अक्टूबर 2027, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

बुधवार, 20 अक्टूबर 2027 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (20:48 तक), नक्षत्र मृगशिरा (04:00, 21 अक्टू॰ तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 06:28 पर और सूर्यास्त 19:41 पर है। राहुकाल 13:05 से 14:44 तक है।

दिन और रात
दिन 06:28 – 19:41
रात 06:27 तक
तिथि
पंचमी, 20:48 तक
षष्ठी
नक्षत्र
मृगशिरा, 04:00 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 20:48 तक
कृष्ण षष्ठी 19:13, 21 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 04:00, 21 अक्टू॰ तक
आर्द्रा 03:02, 22 अक्टू॰ तक
योग
वरीयान 12:35 तक
परिघअशुभ 10:12, 21 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 09:32 तक
तैतिल 20:48 तक
गर 08:02, 21 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 16:24 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:28
सूर्यास्त
19:41
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
09:10
दिनमान
13h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:02 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
12:38 – 13:31 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:05 – 14:44
यमगंड
08:08 – 09:47
गुलिक काल
11:26 – 13:05

20 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:28 – 08:08शुभ
अमृत08:08 – 09:47शुभ
काल09:47 – 11:26टालें
शुभ11:26 – 13:05शुभ
रोग13:05 – 14:44टालें
उद्वेग14:44 – 16:23टालें
चर16:23 – 18:02सामान्य
लाभ18:02 – 19:41शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:41 – 21:02टालें
शुभ21:02 – 22:23शुभ
अमृत22:23 – 23:43शुभ
चर23:43 – 01:04सामान्य
रोग01:04 – 02:25टालें
काल02:25 – 03:46टालें
लाभ03:46 – 05:06शुभ
उद्वेग05:06 – 06:27टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:2807:35दिन
चंद्र07:3508:41दिन
शनि08:4109:47दिन
गुरु09:4710:53दिन
मंगल10:5311:59दिन
सूर्य11:5913:05दिन
शुक्र13:0514:11दिन
बुध14:1115:17दिन
चंद्र15:1716:23दिन
शनि16:2317:29दिन
गुरु17:2918:35दिन
मंगल18:3519:41दिन
सूर्य19:4120:35रात
शुक्र20:3521:29रात
बुध21:2922:23रात
चंद्र22:2323:17रात
शनि23:1700:10रात
गुरु00:1001:04रात
मंगल01:0401:58रात
सूर्य01:5802:52रात
शुक्र02:5203:46रात
बुध03:4604:39रात
चंद्र04:3905:33रात
शनि05:3306:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2454° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।