19 अक्टूबर 2027 को मेलबर्न का पंचांग

मंगलवार, 19 अक्टूबर 2027, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

मंगलवार, 19 अक्टूबर 2027 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (22:12 तक), नक्षत्र रोहिणी (04:45, 20 अक्टू॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:30 पर और सूर्यास्त 19:40 पर है। राहुकाल 16:23 से 18:01 तक है।

दिन और रात
दिन 06:30 – 19:40
रात 06:28 तक
तिथि
चतुर्थी, 22:12 तक
पंचमी
नक्षत्र
रोहिणी, 04:45 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 22:12 तक
कृष्ण पंचमी 20:48, 20 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 04:45, 20 अक्टू॰ तक
मृगशिरा 04:00, 21 अक्टू॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 14:47 तक
वरीयान 12:35, 20 अक्टू॰ तक
करण
बव 10:49 तक
बालव 22:12 तक
कौलव 09:32, 20 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:30
सूर्यास्त
19:40
चंद्रोदय
23:53
चंद्रास्त
08:15
दिनमान
13h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:03 – 05:46
अभिजीत मुहूर्त
12:39 – 13:31

अशुभ समय

राहुकाल
16:23 – 18:01
यमगंड
09:47 – 11:26
गुलिक काल
13:05 – 14:44

19 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:30 – 08:09टालें
उद्वेग08:09 – 09:47टालें
चर09:47 – 11:26सामान्य
लाभ11:26 – 13:05शुभ
अमृत13:05 – 14:44शुभ
काल14:44 – 16:23टालें
शुभ16:23 – 18:01शुभ
रोग18:01 – 19:40टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:40 – 21:01टालें
लाभ21:01 – 22:22शुभ
उद्वेग22:22 – 23:43टालें
शुभ23:43 – 01:04शुभ
अमृत01:04 – 02:25शुभ
चर02:25 – 03:46सामान्य
रोग03:46 – 05:07टालें
काल05:07 – 06:28टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3007:36दिन
सूर्य07:3608:42दिन
शुक्र08:4209:47दिन
बुध09:4710:53दिन
चंद्र10:5311:59दिन
शनि11:5913:05दिन
गुरु13:0514:11दिन
मंगल14:1115:17दिन
सूर्य15:1716:23दिन
शुक्र16:2317:29दिन
बुध17:2918:34दिन
चंद्र18:3419:40दिन
शनि19:4020:34रात
गुरु20:3421:28रात
मंगल21:2822:22रात
सूर्य22:2223:16रात
शुक्र23:1600:10रात
बुध00:1001:04रात
चंद्र01:0401:58रात
शनि01:5802:52रात
गुरु02:5203:46रात
मंगल03:4604:40रात
सूर्य04:4005:34रात
शुक्र05:3406:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2453° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।