24 अक्टूबर 2027 को मेलबर्न का पंचांग

रविवार, 24 अक्टूबर 2027, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

रविवार, 24 अक्टूबर 2027 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (13:23 तक), नक्षत्र आश्लेषा (23:11 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:23 पर और सूर्यास्त 19:45 पर है। राहुकाल 18:05 से 19:45 तक है।

दिन और रात
दिन 06:23 – 19:45
रात 06:22 तक
तिथि
नवमी, 13:23 तक
दशमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 23:11 तक
मघा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण नवमी 13:23 तक
कृष्ण दशमी 11:10, 25 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 21:39, 25 अक्टू॰ तक
योग
शुभ 23:17 तक
शुक्ल 20:17, 25 अक्टू॰ तक
करण
गर 13:23 तक
वणिज 00:18, 25 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 11:10, 25 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 23:11 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:23
सूर्यास्त
19:45
चंद्रोदय
03:06
चंद्रास्त
13:47
दिनमान
13h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:58 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
12:37 – 13:31

अशुभ समय

राहुकाल
18:05 – 19:45
यमगंड
13:04 – 14:45
गुलिक काल
16:25 – 18:05

24 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:23 – 08:03टालें
चर08:03 – 09:44सामान्य
लाभ09:44 – 11:24शुभ
अमृत11:24 – 13:04शुभ
काल13:04 – 14:45टालें
शुभ14:45 – 16:25शुभ
रोग16:25 – 18:05टालें
उद्वेग18:05 – 19:45टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:45 – 21:05शुभ
अमृत21:05 – 22:24शुभ
चर22:24 – 23:44सामान्य
रोग23:44 – 01:04टालें
काल01:04 – 02:23टालें
लाभ02:23 – 03:43शुभ
उद्वेग03:43 – 05:02टालें
शुभ05:02 – 06:22शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2307:30दिन
शुक्र07:3008:37दिन
बुध08:3709:44दिन
चंद्र09:4410:51दिन
शनि10:5111:57दिन
गुरु11:5713:04दिन
मंगल13:0414:11दिन
सूर्य14:1115:18दिन
शुक्र15:1816:25दिन
बुध16:2517:32दिन
चंद्र17:3218:38दिन
शनि18:3819:45दिन
गुरु19:4520:38रात
मंगल20:3821:31रात
सूर्य21:3122:24रात
शुक्र22:2423:17रात
बुध23:1700:11रात
चंद्र00:1101:04रात
शनि01:0401:57रात
गुरु01:5702:50रात
मंगल02:5003:43रात
सूर्य03:4304:36रात
शुक्र04:3605:29रात
बुध05:2906:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2455° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।