28 अक्टूबर 2027 को मेलबर्न का पंचांग

गुरुवार, 28 अक्टूबर 2027, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

गुरुवार, 28 अक्टूबर 2027 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (02:18, 29 अक्टू॰ तक), नक्षत्र हस्त (17:06 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:18 पर और सूर्यास्त 19:49 पर है। राहुकाल 14:45 से 16:27 तक है।

दिन और रात
दिन 06:18 – 19:49
रात 06:17 तक
तिथि
चतुर्दशी, 02:18 तक
अमावस्या
नक्षत्र
हस्त, 17:06 तक
चित्रा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 02:18, 29 अक्टू॰ तक
अमावस्या 00:36, 30 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
हस्त 17:06 तक
चित्रा 15:57, 29 अक्टू॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 11:15 तक
विष्कंभअशुभ 08:31, 29 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:17 तक
शकुनि 02:18, 29 अक्टू॰ तक
चतुष्पद 13:24, 29 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 04:29, 29 अक्टू॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:18
सूर्यास्त
19:49
चंद्रोदय
05:02
चंद्रास्त
18:30
दिनमान
13h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:36
अभिजीत मुहूर्त
12:37 – 13:31

अशुभ समय

राहुकाल
14:45 – 16:27
यमगंड
06:18 – 08:00
गुलिक काल
09:41 – 11:22

28 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:18 – 08:00शुभ
रोग08:00 – 09:41टालें
उद्वेग09:41 – 11:22टालें
चर11:22 – 13:04सामान्य
लाभ13:04 – 14:45शुभ
अमृत14:45 – 16:27शुभ
काल16:27 – 18:08टालें
शुभ18:08 – 19:49शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:49 – 21:08शुभ
चर21:08 – 22:26सामान्य
रोग22:26 – 23:45टालें
काल23:45 – 01:03टालें
लाभ01:03 – 02:22शुभ
उद्वेग02:22 – 03:40टालें
शुभ03:40 – 04:59शुभ
अमृत04:59 – 06:17शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:1807:26दिन
मंगल07:2608:33दिन
सूर्य08:3309:41दिन
शुक्र09:4110:49दिन
बुध10:4911:56दिन
चंद्र11:5613:04दिन
शनि13:0414:11दिन
गुरु14:1115:19दिन
मंगल15:1916:27दिन
सूर्य16:2717:34दिन
शुक्र17:3418:42दिन
बुध18:4219:49दिन
चंद्र19:4920:42रात
शनि20:4221:34रात
गुरु21:3422:26रात
मंगल22:2623:19रात
सूर्य23:1900:11रात
शुक्र00:1101:03रात
बुध01:0301:55रात
चंद्र01:5502:48रात
शनि02:4803:40रात
गुरु03:4004:32रात
मंगल04:3205:25रात
सूर्य05:2506:17रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2457° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।