4 नवंबर 2029 को मस्कट का पंचांग

रविवार, 4 नवंबर 2029, मस्कट, Oman। समय Asia/Muscat में है।

रविवार, 4 नवंबर 2029 को मस्कट में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (16:00 तक), नक्षत्र हस्त (14:49 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:13 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 16:01 से 17:25 तक है।

दिन और रात
दिन 06:13 – 17:25
रात 06:14 तक
तिथि
त्रयोदशी, 16:00 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
हस्त, 14:49 तक
चित्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 नवंबर 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 16:00 तक
कृष्ण चतुर्दशी 12:15, 5 नव॰ तक
नक्षत्र
हस्त 14:49 तक
चित्रा 11:51, 5 नव॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 17:45 तक
प्रीति 13:27, 5 नव॰ तक
करण
वणिज 16:00 तक
विष्टि (भद्रा) 02:09, 5 नव॰ तक
शकुनि 12:15, 5 नव॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 01:21, 5 नव॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:13
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
04:00
चंद्रास्त
15:48
दिनमान
11h 12m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:31 – 05:22
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
16:01 – 17:25
यमगंड
11:49 – 13:13
गुलिक काल
14:37 – 16:01

4 नवंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:13 – 07:37टालें
चर07:37 – 09:01सामान्य
लाभ09:01 – 10:25शुभ
अमृत10:25 – 11:49शुभ
काल11:49 – 13:13टालें
शुभ13:13 – 14:37शुभ
रोग14:37 – 16:01टालें
उद्वेग16:01 – 17:25टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:25 – 19:01शुभ
अमृत19:01 – 20:37शुभ
चर20:37 – 22:14सामान्य
रोग22:14 – 23:50टालें
काल23:50 – 01:26टालें
लाभ01:26 – 03:02शुभ
उद्वेग03:02 – 04:38टालें
शुभ04:38 – 06:14शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:1307:09दिन
शुक्र07:0908:05दिन
बुध08:0509:01दिन
चंद्र09:0109:57दिन
शनि09:5710:53दिन
गुरु10:5311:49दिन
मंगल11:4912:45दिन
सूर्य12:4513:41दिन
शुक्र13:4114:37दिन
बुध14:3715:33दिन
चंद्र15:3316:29दिन
शनि16:2917:25दिन
गुरु17:2518:29रात
मंगल18:2919:33रात
सूर्य19:3320:37रात
शुक्र20:3721:41रात
बुध21:4122:46रात
चंद्र22:4623:50रात
शनि23:5000:54रात
गुरु00:5401:58रात
मंगल01:5803:02रात
सूर्य03:0204:06रात
शुक्र04:0605:10रात
बुध05:1006:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां मस्कट में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2739° (लाहिड़ी)। समय मस्कट (Asia/Muscat) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।