20 मार्च 2025 को मैसूरु का पंचांग

गुरुवार, 20 मार्च 2025, मैसूरु, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 20 मार्च 2025 को मैसूरु में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (02:45, 21 मार्च तक), नक्षत्र अनुराधा (23:31 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:27 पर और सूर्यास्त 18:34 पर है। राहुकाल 14:01 से 15:32 तक है।

दिन और रात
दिन 06:27 – 18:34
रात 06:27 तक
तिथि
षष्ठी, 02:45 तक
सप्तमी
नक्षत्र
अनुराधा, 23:31 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 मार्च 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 02:45, 21 मार्च तक
कृष्ण सप्तमी 04:24, 22 मार्च तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 01:45, 22 मार्च तक
योग
वज्रअशुभ 18:19 तक
सिद्धि 18:41, 21 मार्च तक
करण
गर 13:44 तक
वणिज 02:45, 21 मार्च तक
विष्टि (भद्रा) 15:39, 21 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:27
सूर्यास्त
18:34
चंद्रोदय
23:29
चंद्रास्त
10:11
दिनमान
12h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:52 – 05:40
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
14:01 – 15:32
यमगंड
06:27 – 07:58
गुलिक काल
09:29 – 11:00

20 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:27 – 07:58शुभ
रोग07:58 – 09:29टालें
उद्वेग09:29 – 11:00टालें
चर11:00 – 12:30सामान्य
लाभ12:30 – 14:01शुभ
अमृत14:01 – 15:32शुभ
काल15:32 – 17:03टालें
शुभ17:03 – 18:34शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:34 – 20:03शुभ
चर20:03 – 21:32सामान्य
रोग21:32 – 23:01टालें
काल23:01 – 00:30टालें
लाभ00:30 – 01:59शुभ
उद्वेग01:59 – 03:28टालें
शुभ03:28 – 04:57शुभ
अमृत04:57 – 06:27शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:2707:28दिन
मंगल07:2808:28दिन
सूर्य08:2809:29दिन
शुक्र09:2910:29दिन
बुध10:2911:30दिन
चंद्र11:3012:30दिन
शनि12:3013:31दिन
गुरु13:3114:32दिन
मंगल14:3215:32दिन
सूर्य15:3216:33दिन
शुक्र16:3317:33दिन
बुध17:3318:34दिन
चंद्र18:3419:33रात
शनि19:3320:33रात
गुरु20:3321:32रात
मंगल21:3222:31रात
सूर्य22:3123:31रात
शुक्र23:3100:30रात
बुध00:3001:30रात
चंद्र01:3002:29रात
शनि02:2903:28रात
गुरु03:2804:28रात
मंगल04:2805:27रात
सूर्य05:2706:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 अप्रैल 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
14 अप्रैल 2025मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां मैसूरु में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2093° (लाहिड़ी)। समय मैसूरु (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।