15 मार्च 2027 को नेल्लोर का पंचांग

सोमवार, 15 मार्च 2027, नेल्लोर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 15 मार्च 2027 को नेल्लोर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (10:51 तक), नक्षत्र रोहिणी (09:26 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:18 पर और सूर्यास्त 18:20 पर है। राहुकाल 07:48 से 09:18 तक है।

दिन और रात
दिन 06:18 – 18:20
रात 06:17 तक
तिथि
सप्तमी, 10:51 तक
अष्टमी
नक्षत्र
रोहिणी, 09:26 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 मार्च 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 10:51 तक
शुक्ल अष्टमी 08:54, 16 मार्च तक
नक्षत्र
रोहिणी 09:26 तक
मृगशिरा 08:13, 16 मार्च तक
योग
प्रीति 14:37 तक
आयुष्मान 11:50, 16 मार्च तक
करण
वणिज 10:51 तक
विष्टि (भद्रा) 21:55 तक
बव 08:54, 16 मार्च तक
चंद्र राशि
वृषभ 20:51 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:18
सूर्यास्त
18:20
चंद्रोदय
11:18
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:30
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
07:48 – 09:18
यमगंड
10:48 – 12:19
गुलिक काल
13:49 – 15:19

15 मार्च 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:18 – 07:48शुभ
काल07:48 – 09:18टालें
शुभ09:18 – 10:48शुभ
रोग10:48 – 12:19टालें
उद्वेग12:19 – 13:49टालें
चर13:49 – 15:19सामान्य
लाभ15:19 – 16:50शुभ
अमृत16:50 – 18:20शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:20 – 19:49सामान्य
रोग19:49 – 21:19टालें
काल21:19 – 22:49टालें
लाभ22:49 – 00:18शुभ
उद्वेग00:18 – 01:48टालें
शुभ01:48 – 03:18शुभ
अमृत03:18 – 04:47शुभ
चर04:47 – 06:17सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:1807:18दिन
शनि07:1808:18दिन
गुरु08:1809:18दिन
मंगल09:1810:18दिन
सूर्य10:1811:19दिन
शुक्र11:1912:19दिन
बुध12:1913:19दिन
चंद्र13:1914:19दिन
शनि14:1915:19दिन
गुरु15:1916:19दिन
मंगल16:1917:20दिन
सूर्य17:2018:20दिन
शुक्र18:2019:20रात
बुध19:2020:19रात
चंद्र20:1921:19रात
शनि21:1922:19रात
गुरु22:1923:19रात
मंगल23:1900:18रात
सूर्य00:1801:18रात
शुक्र01:1802:18रात
बुध02:1803:18रात
चंद्र03:1804:17रात
शनि04:1705:17रात
गुरु05:1706:17रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 मार्च 2027मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 मार्च 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 मार्च 2027फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
26 मार्च 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 मार्च 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 अप्रैल 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 अप्रैल 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 अप्रैल 2027चैत्र अमावस्याअमावस्या
10 अप्रैल 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नेल्लोर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2370° (लाहिड़ी)। समय नेल्लोर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।