17 अक्टूबर 2000 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 17 अक्टूबर 2000, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 17 अक्टूबर 2000 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (08:27 तक), नक्षत्र रोहिणी (17:16 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 06:23 पर और सूर्यास्त 17:49 पर है। राहुकाल 14:57 से 16:23 तक है।

दिन और रात
दिन 06:23 – 17:49
रात 06:23 तक
तिथि
पंचमी
नक्षत्र
रोहिणी, 17:16 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 अक्टूबर 2000 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 08:27 तक
कृष्ण पंचमी 06:30, 18 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 17:16 तक
मृगशिरा 16:01, 18 अक्टू॰ तक
योग
वरीयान 03:02, 18 अक्टू॰ तक
परिघअशुभ 00:15, 19 अक्टू॰ तक
करण
बालव 08:27 तक
कौलव 19:29 तक
तैतिल 06:30, 18 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 04:39, 18 अक्टू॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:23
सूर्यास्त
17:49
चंद्रोदय
21:03
चंद्रास्त
10:08
दिनमान
11h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2057
शक संवत
1922, विक्रम संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:32
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
14:57 – 16:23
यमगंड
09:14 – 10:40
गुलिक काल
12:06 – 13:32

17 अक्टूबर 2000 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:23 – 07:48टालें
उद्वेग07:48 – 09:14टालें
चर09:14 – 10:40सामान्य
लाभ10:40 – 12:06शुभ
अमृत12:06 – 13:32शुभ
काल13:32 – 14:57टालें
शुभ14:57 – 16:23शुभ
रोग16:23 – 17:49टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:49 – 19:23टालें
लाभ19:23 – 20:58शुभ
उद्वेग20:58 – 22:32टालें
शुभ22:32 – 00:06शुभ
अमृत00:06 – 01:40शुभ
चर01:40 – 03:15सामान्य
रोग03:15 – 04:49टालें
काल04:49 – 06:23टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:2307:20दिन
सूर्य07:2008:17दिन
शुक्र08:1709:14दिन
बुध09:1410:11दिन
चंद्र10:1111:09दिन
शनि11:0912:06दिन
गुरु12:0613:03दिन
मंगल13:0314:00दिन
सूर्य14:0014:57दिन
शुक्र14:5715:55दिन
बुध15:5516:52दिन
चंद्र16:5217:49दिन
शनि17:4918:52रात
गुरु18:5219:55रात
मंगल19:5520:58रात
सूर्य20:5822:00रात
शुक्र22:0023:03रात
बुध23:0300:06रात
चंद्र00:0601:09रात
शनि01:0902:12रात
गुरु02:1203:15रात
मंगल03:1504:18रात
सूर्य04:1805:20रात
शुक्र05:2006:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2000संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2000तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2000कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 अक्टू॰ 2000कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 अक्टू॰ 2000प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 अक्टू॰ 2000कार्तिक अमावस्याअमावस्या
31 अक्टू॰ 2000विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 नव॰ 2000शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 नव॰ 2000प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 नव॰ 2000कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
15 नव॰ 2000संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8681° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।