24 मई 2001 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 24 मई 2001, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 24 मई 2001 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (06:32 तक), नक्षत्र रोहिणी (10:25 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:26 पर और सूर्यास्त 19:10 पर है। राहुकाल 14:01 से 15:44 तक है।

दिन और रात
दिन 05:26 – 19:10
रात 05:25 तक
तिथि
द्वितीया, 04:30 तक
नक्षत्र
रोहिणी, 10:25 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 मई 2001 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 06:32 तक
शुक्ल द्वितीया 04:30, 25 मई तक
शुक्ल तृतीया 02:15, 26 मई तक
नक्षत्र
रोहिणी 10:25 तक
मृगशिरा 09:07, 25 मई तक
योग
सुकर्मा 11:40 तक
धृति 08:54, 25 मई तक
करण
बव 06:32 तक
बालव 17:33 तक
कौलव 04:30, 25 मई तक
तैतिल 15:24, 25 मई तक
चंद्र राशि
वृषभ 21:48 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:26
सूर्यास्त
19:10
चंद्रोदय
06:22
चंद्रास्त
20:32
दिनमान
13h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:03 – 04:45
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
14:01 – 15:44
यमगंड
05:26 – 07:09
गुलिक काल
08:52 – 10:35

24 मई 2001 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:26 – 07:09शुभ
रोग07:09 – 08:52टालें
उद्वेग08:52 – 10:35टालें
चर10:35 – 12:18सामान्य
लाभ12:18 – 14:01शुभ
अमृत14:01 – 15:44शुभ
काल15:44 – 17:27टालें
शुभ17:27 – 19:10शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:10 – 20:27शुभ
चर20:27 – 21:43सामान्य
रोग21:43 – 23:00टालें
काल23:00 – 00:17टालें
लाभ00:17 – 01:34शुभ
उद्वेग01:34 – 02:51टालें
शुभ02:51 – 04:08शुभ
अमृत04:08 – 05:25शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:2606:34दिन
मंगल06:3407:43दिन
सूर्य07:4308:52दिन
शुक्र08:5210:00दिन
बुध10:0011:09दिन
चंद्र11:0912:18दिन
शनि12:1813:26दिन
गुरु13:2614:35दिन
मंगल14:3515:44दिन
सूर्य15:4416:52दिन
शुक्र16:5218:01दिन
बुध18:0119:10दिन
चंद्र19:1020:01रात
शनि20:0120:52रात
गुरु20:5221:43रात
मंगल21:4322:35रात
सूर्य22:3523:26रात
शुक्र23:2600:17रात
बुध00:1701:09रात
चंद्र01:0902:00रात
शनि02:0002:51रात
गुरु02:5103:43रात
मंगल03:4304:34रात
सूर्य04:3405:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 मई 2001विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 जून 2001शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 जून 2001प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 जून 2001ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
10 जून 2001संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 जून 2001कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 जून 2001मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
17 जून 2001कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
19 जून 2001प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 जून 2001आषाढ़ अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8765° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।