29 सितंबर 2001 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 29 सितंबर 2001, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 29 सितंबर 2001 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (12:46 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (13:26 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:12 पर और सूर्यास्त 18:09 पर है। राहुकाल 09:12 से 10:41 तक है।

दिन और रात
दिन 06:12 – 18:09
रात 06:13 तक
तिथि
द्वादशी, 12:46 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 13:26 तक
शतभिषा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 सितंबर 2001 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 12:46 तक
शुक्ल त्रयोदशी 15:11, 30 सित॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 16:21, 30 सित॰ तक
योग
धृति 09:00 तक
शूलअशुभ 09:54, 30 सित॰ तक
करण
बालव 12:46 तक
कौलव 02:00, 30 सित॰ तक
तैतिल 15:11, 30 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:12
सूर्यास्त
18:09
चंद्रोदय
16:44
चंद्रास्त
03:08
दिनमान
11h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
अधिक आश्विन
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:36 – 05:24
अभिजीत मुहूर्त
11:47 – 12:35

अशुभ समय

राहुकाल
09:12 – 10:41
यमगंड
13:40 – 15:10
गुलिक काल
06:12 – 07:42

29 सितंबर 2001 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:12 – 07:42टालें
शुभ07:42 – 09:12शुभ
रोग09:12 – 10:41टालें
उद्वेग10:41 – 12:11टालें
चर12:11 – 13:40सामान्य
लाभ13:40 – 15:10शुभ
अमृत15:10 – 16:40शुभ
काल16:40 – 18:09टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:09 – 19:40शुभ
उद्वेग19:40 – 21:10टालें
शुभ21:10 – 22:41शुभ
अमृत22:41 – 00:11शुभ
चर00:11 – 01:42सामान्य
रोग01:42 – 03:12टालें
काल03:12 – 04:43टालें
लाभ04:43 – 06:13शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:1207:12दिन
गुरु07:1208:12दिन
मंगल08:1209:12दिन
सूर्य09:1210:11दिन
शुक्र10:1111:11दिन
बुध11:1112:11दिन
चंद्र12:1113:11दिन
शनि13:1114:10दिन
गुरु14:1015:10दिन
मंगल15:1016:10दिन
सूर्य16:1017:09दिन
शुक्र17:0918:09दिन
बुध18:0919:09रात
चंद्र19:0920:10रात
शनि20:1021:10रात
गुरु21:1022:10रात
मंगल22:1023:11रात
सूर्य23:1100:11रात
शुक्र00:1101:11रात
बुध01:1102:12रात
चंद्र02:1203:12रात
शनि03:1204:12रात
गुरु04:1205:13रात
मंगल05:1306:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 सित॰ 2001प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अक्टू॰ 2001अधिक आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
6 अक्टू॰ 2001संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अक्टू॰ 2001कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 अक्टू॰ 2001कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 अक्टू॰ 2001प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 अक्टू॰ 2001अधिक आश्विन अमावस्याअमावस्या
17 अक्टू॰ 2001तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2001विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 अक्टू॰ 2001शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8814° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।