21 फ़रवरी 2002 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2002, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2002 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (05:55, 22 फ़र॰ तक), नक्षत्र रोहिणी (22:38 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:54 पर और सूर्यास्त 18:15 पर है। राहुकाल 14:00 से 15:25 तक है।

दिन और रात
दिन 06:54 – 18:15
रात 06:53 तक
तिथि
नवमी, 05:55 तक
दशमी
नक्षत्र
रोहिणी, 22:38 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 फ़रवरी 2002 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल नवमी 05:55, 22 फ़र॰ तक
शुक्ल दशमी 05:08, 23 फ़र॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 22:38 तक
मृगशिरा 22:44, 22 फ़र॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 18:37 तक
विष्कंभअशुभ 17:10, 22 फ़र॰ तक
करण
बालव 18:00 तक
कौलव 05:55, 22 फ़र॰ तक
तैतिल 17:38, 22 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:54
सूर्यास्त
18:15
चंद्रोदय
12:10
चंद्रास्त
01:20
दिनमान
11h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:13 – 06:03
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
14:00 – 15:25
यमगंड
06:54 – 08:19
गुलिक काल
09:44 – 11:09

21 फ़रवरी 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:54 – 08:19शुभ
रोग08:19 – 09:44टालें
उद्वेग09:44 – 11:09टालें
चर11:09 – 12:35सामान्य
लाभ12:35 – 14:00शुभ
अमृत14:00 – 15:25शुभ
काल15:25 – 16:50टालें
शुभ16:50 – 18:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:15 – 19:50शुभ
चर19:50 – 21:24सामान्य
रोग21:24 – 22:59टालें
काल22:59 – 00:34टालें
लाभ00:34 – 02:09शुभ
उद्वेग02:09 – 03:44टालें
शुभ03:44 – 05:18शुभ
अमृत05:18 – 06:53शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:5407:51दिन
मंगल07:5108:48दिन
सूर्य08:4809:44दिन
शुक्र09:4410:41दिन
बुध10:4111:38दिन
चंद्र11:3812:35दिन
शनि12:3513:31दिन
गुरु13:3114:28दिन
मंगल14:2815:25दिन
सूर्य15:2516:21दिन
शुक्र16:2117:18दिन
बुध17:1818:15दिन
चंद्र18:1519:18रात
शनि19:1820:21रात
गुरु20:2121:24रात
मंगल21:2422:28रात
सूर्य22:2823:31रात
शुक्र23:3100:34रात
बुध00:3401:37रात
चंद्र01:3702:40रात
शनि02:4003:44रात
गुरु03:4404:47रात
मंगल04:4705:50रात
सूर्य05:5006:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 फ़र॰ 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
25 फ़र॰ 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 फ़र॰ 2002माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 मार्च 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 मार्च 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 मार्च 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 मार्च 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 मार्च 2002फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
14 मार्च 2002मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8869° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।