26 फ़रवरी 2002 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 26 फ़रवरी 2002, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 26 फ़रवरी 2002 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (18:35 तक), नक्षत्र आश्लेषा (15:37 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:49 पर और सूर्यास्त 18:18 पर है। राहुकाल 15:26 से 16:52 तक है।

दिन और रात
दिन 06:49 – 18:18
रात 06:48 तक
तिथि
चतुर्दशी, 18:35 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
आश्लेषा, 15:37 तक
मघा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 फ़रवरी 2002 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 18:35 तक
पूर्णिमा 14:46, 27 फ़र॰ तक
नक्षत्र
मघा 12:36, 27 फ़र॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 00:53, 27 फ़र॰ तक
सुकर्मा 20:30, 27 फ़र॰ तक
करण
गर 08:23 तक
वणिज 18:35 तक
विष्टि (भद्रा) 04:42, 27 फ़र॰ तक
बव 14:46, 27 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 15:37 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:49
सूर्यास्त
18:18
चंद्रोदय
17:12
चंद्रास्त
06:08
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:09 – 05:59
अभिजीत मुहूर्त
12:11 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
15:26 – 16:52
यमगंड
09:42 – 11:08
गुलिक काल
12:34 – 14:00

26 फ़रवरी 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:49 – 08:15टालें
उद्वेग08:15 – 09:42टालें
चर09:42 – 11:08सामान्य
लाभ11:08 – 12:34शुभ
अमृत12:34 – 14:00शुभ
काल14:00 – 15:26टालें
शुभ15:26 – 16:52शुभ
रोग16:52 – 18:18टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:18 – 19:52टालें
लाभ19:52 – 21:26शुभ
उद्वेग21:26 – 23:00टालें
शुभ23:00 – 00:33शुभ
अमृत00:33 – 02:07शुभ
चर02:07 – 03:41सामान्य
रोग03:41 – 05:15टालें
काल05:15 – 06:48टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:4907:47दिन
सूर्य07:4708:44दिन
शुक्र08:4409:42दिन
बुध09:4210:39दिन
चंद्र10:3911:36दिन
शनि11:3612:34दिन
गुरु12:3413:31दिन
मंगल13:3114:29दिन
सूर्य14:2915:26दिन
शुक्र15:2616:23दिन
बुध16:2317:21दिन
चंद्र17:2118:18दिन
शनि18:1819:21रात
गुरु19:2120:23रात
मंगल20:2321:26रात
सूर्य21:2622:28रात
शुक्र22:2823:31रात
बुध23:3100:33रात
चंद्र00:3301:36रात
शनि01:3602:38रात
गुरु02:3803:41रात
मंगल03:4104:43रात
सूर्य04:4305:46रात
शुक्र05:4606:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 फ़र॰ 2002माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 मार्च 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 मार्च 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 मार्च 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 मार्च 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 मार्च 2002फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
14 मार्च 2002मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 मार्च 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 मार्च 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8871° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।