25 मार्च 2002 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 25 मार्च 2002, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 25 मार्च 2002 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (14:22 तक), नक्षत्र आश्लेषा (02:22, 26 मार्च तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:19 पर और सूर्यास्त 18:35 पर है। राहुकाल 07:51 से 09:23 तक है।

दिन और रात
दिन 06:19 – 18:35
रात 06:18 तक
तिथि
एकादशी, 14:22 तक
द्वादशी
नक्षत्र
आश्लेषा, 02:22 तक
मघा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 मार्च 2002 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 14:22 तक
शुक्ल द्वादशी 11:15, 26 मार्च तक
नक्षत्र
आश्लेषा 02:22, 26 मार्च तक
मघा 23:44, 26 मार्च तक
योग
सुकर्मा 14:26 तक
धृति 10:43, 26 मार्च तक
करण
विष्टि (भद्रा) 14:22 तक
बव 00:52, 26 मार्च तक
बालव 11:15, 26 मार्च तक
चंद्र राशि
कर्क 02:22, 26 मार्च तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:19
सूर्यास्त
18:35
चंद्रोदय
14:48
चंद्रास्त
03:55
दिनमान
12h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:45 – 05:32
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
07:51 – 09:23
यमगंड
10:55 – 12:27
गुलिक काल
13:59 – 15:31

25 मार्च 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:19 – 07:51शुभ
काल07:51 – 09:23टालें
शुभ09:23 – 10:55शुभ
रोग10:55 – 12:27टालें
उद्वेग12:27 – 13:59टालें
चर13:59 – 15:31सामान्य
लाभ15:31 – 17:03शुभ
अमृत17:03 – 18:35शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:35 – 20:02सामान्य
रोग20:02 – 21:30टालें
काल21:30 – 22:58टालें
लाभ22:58 – 00:26शुभ
उद्वेग00:26 – 01:54टालें
शुभ01:54 – 03:22शुभ
अमृत03:22 – 04:50शुभ
चर04:50 – 06:18सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:1907:21दिन
शनि07:2108:22दिन
गुरु08:2209:23दिन
मंगल09:2310:24दिन
सूर्य10:2411:26दिन
शुक्र11:2612:27दिन
बुध12:2713:28दिन
चंद्र13:2814:29दिन
शनि14:2915:31दिन
गुरु15:3116:32दिन
मंगल16:3217:33दिन
सूर्य17:3318:35दिन
शुक्र18:3519:33रात
बुध19:3320:32रात
चंद्र20:3221:30रात
शनि21:3022:29रात
गुरु22:2923:28रात
मंगल23:2800:26रात
सूर्य00:2601:25रात
शुक्र01:2502:24रात
बुध02:2403:22रात
चंद्र03:2204:21रात
शनि04:2105:20रात
गुरु05:2006:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 मार्च 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 मार्च 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 मार्च 2002फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
1 अप्रैल 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 अप्रैल 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 अप्रैल 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अप्रैल 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अप्रैल 2002चैत्र अमावस्याअमावस्या
14 अप्रैल 2002मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
23 अप्रैल 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8882° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।