1 दिसंबर 2002 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 1 दिसंबर 2002, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 1 दिसंबर 2002 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (22:07 तक), नक्षत्र चित्रा (17:39 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:56 पर और सूर्यास्त 17:23 पर है। राहुकाल 16:05 से 17:23 तक है।

दिन और रात
दिन 06:56 – 17:23
रात 06:56 तक
तिथि
द्वादशी, 22:07 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
चित्रा, 17:39 तक
स्वाति
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 दिसंबर 2002 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 22:07 तक
कृष्ण त्रयोदशी 19:01, 2 दिस॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 17:39 तक
स्वाति 15:17, 2 दिस॰ तक
योग
सौभाग्य 19:51 तक
शोभन 16:05, 2 दिस॰ तक
करण
कौलव 11:39 तक
तैतिल 22:07 तक
गर 08:34, 2 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:56
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
03:20
चंद्रास्त
15:15
दिनमान
10h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2059
शक संवत
1924, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:07 – 06:01
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:30

अशुभ समय

राहुकाल
16:05 – 17:23
यमगंड
12:09 – 13:28
गुलिक काल
14:46 – 16:05

1 दिसंबर 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:56 – 08:14टालें
चर08:14 – 09:33सामान्य
लाभ09:33 – 10:51शुभ
अमृत10:51 – 12:09शुभ
काल12:09 – 13:28टालें
शुभ13:28 – 14:46शुभ
रोग14:46 – 16:05टालें
उद्वेग16:05 – 17:23टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:23 – 19:05शुभ
अमृत19:05 – 20:47शुभ
चर20:47 – 22:28सामान्य
रोग22:28 – 00:10टालें
काल00:10 – 01:51टालें
लाभ01:51 – 03:33शुभ
उद्वेग03:33 – 05:15टालें
शुभ05:15 – 06:56शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:5607:48दिन
शुक्र07:4808:40दिन
बुध08:4009:33दिन
चंद्र09:3310:25दिन
शनि10:2511:17दिन
गुरु11:1712:09दिन
मंगल12:0913:02दिन
सूर्य13:0213:54दिन
शुक्र13:5414:46दिन
बुध14:4615:39दिन
चंद्र15:3916:31दिन
शनि16:3117:23दिन
गुरु17:2318:31रात
मंगल18:3119:39रात
सूर्य19:3920:47रात
शुक्र20:4721:54रात
बुध21:5423:02रात
चंद्र23:0200:10रात
शनि00:1001:18रात
गुरु01:1802:25रात
मंगल02:2503:33रात
सूर्य03:3304:41रात
शुक्र04:4105:49रात
बुध05:4906:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 दिस॰ 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 दिस॰ 2002मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
7 दिस॰ 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 दिस॰ 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2002धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 दिस॰ 2002मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
23 दिस॰ 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 दिस॰ 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 दिस॰ 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8978° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।