30 दिसंबर 2002 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 30 दिसंबर 2002, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 30 दिसंबर 2002 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (10:15 तक), नक्षत्र विशाखा (21:52 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 07:13 पर और सूर्यास्त 17:33 पर है। राहुकाल 08:30 से 09:48 तक है।

दिन और रात
दिन 07:13 – 17:33
रात 07:13 तक
तिथि
एकादशी, 10:15 तक
द्वादशी
नक्षत्र
विशाखा, 21:52 तक
अनुराधा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 दिसंबर 2002 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 10:15 तक
कृष्ण द्वादशी 07:55, 31 दिस॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 21:52 तक
अनुराधा 20:16, 31 दिस॰ तक
योग
धृति 19:25 तक
शूलअशुभ 16:18, 31 दिस॰ तक
करण
बालव 10:15 तक
कौलव 21:04 तक
तैतिल 07:55, 31 दिस॰ तक
चंद्र राशि
तुला 16:16 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:13
सूर्यास्त
17:33
चंद्रोदय
03:19
चंद्रास्त
14:30
दिनमान
10h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2059
शक संवत
1924, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:23 – 06:18
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
08:30 – 09:48
यमगंड
11:05 – 12:23
गुलिक काल
13:41 – 14:58

30 दिसंबर 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:13 – 08:30शुभ
काल08:30 – 09:48टालें
शुभ09:48 – 11:05शुभ
रोग11:05 – 12:23टालें
उद्वेग12:23 – 13:41टालें
चर13:41 – 14:58सामान्य
लाभ14:58 – 16:16शुभ
अमृत16:16 – 17:33शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:33 – 19:16सामान्य
रोग19:16 – 20:58टालें
काल20:58 – 22:41टालें
लाभ22:41 – 00:23शुभ
उद्वेग00:23 – 02:06टालें
शुभ02:06 – 03:48शुभ
अमृत03:48 – 05:31शुभ
चर05:31 – 07:13सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:1308:04दिन
शनि08:0408:56दिन
गुरु08:5609:48दिन
मंगल09:4810:40दिन
सूर्य10:4011:31दिन
शुक्र11:3112:23दिन
बुध12:2313:15दिन
चंद्र13:1514:06दिन
शनि14:0614:58दिन
गुरु14:5815:50दिन
मंगल15:5016:42दिन
सूर्य16:4217:33दिन
शुक्र17:3318:42रात
बुध18:4219:50रात
चंद्र19:5020:58रात
शनि20:5822:07रात
गुरु22:0723:15रात
मंगल23:1500:23रात
सूर्य00:2301:32रात
शुक्र01:3202:40रात
बुध02:4003:48रात
चंद्र03:4804:56रात
शनि04:5606:05रात
गुरु06:0507:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 दिस॰ 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 दिस॰ 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 जन॰ 2003पौष अमावस्याअमावस्या
6 जन॰ 2003विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2003शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 जन॰ 2003मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2003प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
18 जन॰ 2003पौष पूर्णिमापूर्णिमा
22 जन॰ 2003संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 जन॰ 2003कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 जन॰ 2003कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8989° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।