14 मई 2003 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 14 मई 2003, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 14 मई 2003 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (16:32 तक), नक्षत्र चित्रा (18:37 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:31 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 12:17 से 13:59 तक है।

दिन और रात
दिन 05:31 – 19:03
रात 05:30 तक
तिथि
त्रयोदशी, 16:32 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
चित्रा, 18:37 तक
स्वाति
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 मई 2003 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 16:32 तक
शुक्ल चतुर्दशी 12:50, 15 मई तक
नक्षत्र
चित्रा 18:37 तक
स्वाति 15:44, 15 मई तक
योग
सिद्धि 14:29 तक
व्यतीपातअशुभ 10:21, 15 मई तक
करण
कौलव 06:18 तक
तैतिल 16:32 तक
गर 02:42, 15 मई तक
वणिज 12:50, 15 मई तक
चंद्र राशि
कन्या 08:00 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:31
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
17:08
चंद्रास्त
04:07
दिनमान
13h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2060
शक संवत
1925, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:49
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:44 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:17 – 13:59
यमगंड
07:12 – 08:54
गुलिक काल
10:36 – 12:17

14 मई 2003 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:31 – 07:12शुभ
अमृत07:12 – 08:54शुभ
काल08:54 – 10:36टालें
शुभ10:36 – 12:17शुभ
रोग12:17 – 13:59टालें
उद्वेग13:59 – 15:40टालें
चर15:40 – 17:22सामान्य
लाभ17:22 – 19:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:03 – 20:22टालें
शुभ20:22 – 21:40शुभ
अमृत21:40 – 22:58शुभ
चर22:58 – 00:17सामान्य
रोग00:17 – 01:35टालें
काल01:35 – 02:54टालें
लाभ02:54 – 04:12शुभ
उद्वेग04:12 – 05:30टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3106:39दिन
चंद्र06:3907:46दिन
शनि07:4608:54दिन
गुरु08:5410:02दिन
मंगल10:0211:09दिन
सूर्य11:0912:17दिन
शुक्र12:1713:25दिन
बुध13:2514:33दिन
चंद्र14:3315:40दिन
शनि15:4016:48दिन
गुरु16:4817:56दिन
मंगल17:5619:03दिन
सूर्य19:0319:56रात
शुक्र19:5620:48रात
बुध20:4821:40रात
चंद्र21:4022:32रात
शनि22:3223:25रात
गुरु23:2500:17रात
मंगल00:1701:09रात
सूर्य01:0902:01रात
शुक्र02:0102:54रात
बुध02:5403:46रात
चंद्र03:4604:38रात
शनि04:3805:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 मई 2003प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 मई 2003वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2003वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
19 मई 2003संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 मई 2003कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 मई 2003कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 मई 2003प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 मई 2003ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
4 जून 2003विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 जून 2003शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 जून 2003प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9040° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।