7 अगस्त 2003 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 7 अगस्त 2003, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 7 अगस्त 2003 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (19:31 तक), नक्षत्र अनुराधा (12:35 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:45 पर और सूर्यास्त 19:08 पर है। राहुकाल 14:07 से 15:47 तक है।

दिन और रात
दिन 05:45 – 19:08
रात 05:46 तक
तिथि
दशमी, 19:31 तक
एकादशी
नक्षत्र
अनुराधा, 12:35 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 अगस्त 2003 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल दशमी 19:31 तक
शुक्ल एकादशी 17:21, 8 अग॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 11:11, 8 अग॰ तक
योग
ब्रह्म 06:31 तक
इंद्र 03:41, 8 अग॰ तक
वैधृतिअशुभ 00:53, 9 अग॰ तक
करण
तैतिल 08:37 तक
गर 19:31 तक
वणिज 06:26, 8 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
19:08
चंद्रोदय
14:56
चंद्रास्त
00:36
दिनमान
13h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2060
शक संवत
1925, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:20 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
14:07 – 15:47
यमगंड
05:45 – 07:25
गुलिक काल
09:06 – 10:46

7 अगस्त 2003 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:45 – 07:25शुभ
रोग07:25 – 09:06टालें
उद्वेग09:06 – 10:46टालें
चर10:46 – 12:26सामान्य
लाभ12:26 – 14:07शुभ
अमृत14:07 – 15:47शुभ
काल15:47 – 17:27टालें
शुभ17:27 – 19:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:08 – 20:27शुभ
चर20:27 – 21:47सामान्य
रोग21:47 – 23:07टालें
काल23:07 – 00:27टालें
लाभ00:27 – 01:46शुभ
उद्वेग01:46 – 03:06टालें
शुभ03:06 – 04:26शुभ
अमृत04:26 – 05:46शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4506:52दिन
मंगल06:5207:59दिन
सूर्य07:5909:06दिन
शुक्र09:0610:13दिन
बुध10:1311:19दिन
चंद्र11:1912:26दिन
शनि12:2613:33दिन
गुरु13:3314:40दिन
मंगल14:4015:47दिन
सूर्य15:4716:54दिन
शुक्र16:5418:01दिन
बुध18:0119:08दिन
चंद्र19:0820:01रात
शनि20:0120:54रात
गुरु20:5421:47रात
मंगल21:4722:40रात
सूर्य22:4023:33रात
शुक्र23:3300:27रात
बुध00:2701:20रात
चंद्र01:2002:13रात
शनि02:1303:06रात
गुरु03:0603:59रात
मंगल03:5904:52रात
सूर्य04:5205:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 अग॰ 2003शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अग॰ 2003प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अग॰ 2003श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
16 अग॰ 2003संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अग॰ 2003सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2003कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 अग॰ 2003कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 अग॰ 2003प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 अग॰ 2003भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
31 अग॰ 2003विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9073° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।