2 दिसंबर 2004 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 2 दिसंबर 2004, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 2 दिसंबर 2004 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (13:30 तक), नक्षत्र पुष्य (13:43 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:57 पर और सूर्यास्त 17:23 पर है। राहुकाल 13:28 से 14:47 तक है।

दिन और रात
दिन 06:57 – 17:23
रात 06:58 तक
तिथि
पंचमी, 13:30 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पुष्य, 13:43 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 दिसंबर 2004 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 13:30 तक
कृष्ण षष्ठी 15:47, 3 दिस॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 13:43 तक
आश्लेषा 16:26, 3 दिस॰ तक
योग
ब्रह्म 13:53 तक
इंद्र 14:32, 3 दिस॰ तक
करण
तैतिल 13:30 तक
गर 02:41, 3 दिस॰ तक
वणिज 15:47, 3 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:57
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
22:00
चंद्रास्त
11:21
दिनमान
10h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2061
शक संवत
1926, तारण संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:08 – 06:03
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
13:28 – 14:47
यमगंड
06:57 – 08:15
गुलिक काल
09:33 – 10:52

2 दिसंबर 2004 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:57 – 08:15शुभ
रोग08:15 – 09:33टालें
उद्वेग09:33 – 10:52टालें
चर10:52 – 12:10सामान्य
लाभ12:10 – 13:28शुभ
अमृत13:28 – 14:47शुभ
काल14:47 – 16:05टालें
शुभ16:05 – 17:23शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:23 – 19:05शुभ
चर19:05 – 20:47सामान्य
रोग20:47 – 22:29टालें
काल22:29 – 00:10टालें
लाभ00:10 – 01:52शुभ
उद्वेग01:52 – 03:34टालें
शुभ03:34 – 05:16शुभ
अमृत05:16 – 06:58शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:5707:49दिन
मंगल07:4908:41दिन
सूर्य08:4109:33दिन
शुक्र09:3310:26दिन
बुध10:2611:18दिन
चंद्र11:1812:10दिन
शनि12:1013:02दिन
गुरु13:0213:55दिन
मंगल13:5514:47दिन
सूर्य14:4715:39दिन
शुक्र15:3916:31दिन
बुध16:3117:23दिन
चंद्र17:2318:31रात
शनि18:3119:39रात
गुरु19:3920:47रात
मंगल20:4721:55रात
सूर्य21:5523:03रात
शुक्र23:0300:10रात
बुध00:1001:18रात
चंद्र01:1802:26रात
शनि02:2603:34रात
गुरु03:3404:42रात
मंगल04:4205:50रात
सूर्य05:5006:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 दिस॰ 2004कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 दिस॰ 2004कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 दिस॰ 2004प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 दिस॰ 2004मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
15 दिस॰ 2004विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 दिस॰ 2004धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
22 दिस॰ 2004शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 दिस॰ 2004प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 दिस॰ 2004मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
30 दिस॰ 2004संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9258° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।