11 दिसंबर 2004 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 11 दिसंबर 2004, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 11 दिसंबर 2004 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (10:29 तक), नक्षत्र अनुराधा (15:26 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 07:03 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 09:39 से 10:56 तक है।

दिन और रात
दिन 07:03 – 17:25
रात 07:04 तक
तिथि
चतुर्दशी, 10:29 तक
अमावस्या, 06:58 तक
नक्षत्र
अनुराधा, 15:26 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 दिसंबर 2004 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 10:29 तक
अमावस्या 06:58, 12 दिस॰ तक
शुक्ल प्रतिपदा 03:16, 13 दिस॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 12:36, 12 दिस॰ तक
योग
धृति 21:44 तक
शूलअशुभ 17:31, 12 दिस॰ तक
करण
शकुनि 10:29 तक
चतुष्पद 20:46 तक
नाग 06:58, 12 दिस॰ तक
किंस्तुघ्न 17:08, 12 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:03
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
06:06
चंद्रास्त
16:35
दिनमान
10h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2061
शक संवत
1926, तारण संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:14 – 06:09
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:35

अशुभ समय

राहुकाल
09:39 – 10:56
यमगंड
13:32 – 14:49
गुलिक काल
07:03 – 08:21

11 दिसंबर 2004 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:03 – 08:21टालें
शुभ08:21 – 09:39शुभ
रोग09:39 – 10:56टालें
उद्वेग10:56 – 12:14टालें
चर12:14 – 13:32सामान्य
लाभ13:32 – 14:49शुभ
अमृत14:49 – 16:07शुभ
काल16:07 – 17:25टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:25 – 19:07शुभ
उद्वेग19:07 – 20:49टालें
शुभ20:49 – 22:32शुभ
अमृत22:32 – 00:14शुभ
चर00:14 – 01:57सामान्य
रोग01:57 – 03:39टालें
काल03:39 – 05:22टालें
लाभ05:22 – 07:04शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:0307:55दिन
गुरु07:5508:47दिन
मंगल08:4709:39दिन
सूर्य09:3910:30दिन
शुक्र10:3011:22दिन
बुध11:2212:14दिन
चंद्र12:1413:06दिन
शनि13:0613:58दिन
गुरु13:5814:49दिन
मंगल14:4915:41दिन
सूर्य15:4116:33दिन
शुक्र16:3317:25दिन
बुध17:2518:33रात
चंद्र18:3319:41रात
शनि19:4120:49रात
गुरु20:4921:58रात
मंगल21:5823:06रात
सूर्य23:0600:14रात
शुक्र00:1401:23रात
बुध01:2302:31रात
चंद्र02:3103:39रात
शनि03:3904:47रात
गुरु04:4705:56रात
मंगल05:5607:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 दिस॰ 2004मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
15 दिस॰ 2004विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 दिस॰ 2004धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
22 दिस॰ 2004शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 दिस॰ 2004प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 दिस॰ 2004मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
30 दिस॰ 2004संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जन॰ 2005कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जन॰ 2005कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 जन॰ 2005प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9261° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।