12 जून 2005 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 12 जून 2005, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 12 जून 2005 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (13:35 तक), नक्षत्र आश्लेषा (18:35 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:22 पर और सूर्यास्त 19:19 पर है। राहुकाल 17:34 से 19:19 तक है।

दिन और रात
दिन 05:22 – 19:19
रात 05:22 तक
तिथि
पंचमी, 13:35 तक
षष्ठी
नक्षत्र
आश्लेषा, 18:35 तक
मघा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 जून 2005 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 13:35 तक
शुक्ल षष्ठी 15:57, 13 जून तक
नक्षत्र
मघा 21:29, 13 जून तक
योग
व्याघातअशुभ 10:21 तक
हर्षण 11:18, 13 जून तक
करण
बालव 13:35 तक
कौलव 02:47, 13 जून तक
तैतिल 15:57, 13 जून तक
चंद्र राशि
कर्क 18:35 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:22
सूर्यास्त
19:19
चंद्रोदय
09:49
चंद्रास्त
23:33
दिनमान
13h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2062
शक संवत
1927, पार्थिव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:42
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:48

अशुभ समय

राहुकाल
17:34 – 19:19
यमगंड
12:21 – 14:05
गुलिक काल
15:50 – 17:34

12 जून 2005 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:22 – 07:07टालें
चर07:07 – 08:51सामान्य
लाभ08:51 – 10:36शुभ
अमृत10:36 – 12:21शुभ
काल12:21 – 14:05टालें
शुभ14:05 – 15:50शुभ
रोग15:50 – 17:34टालें
उद्वेग17:34 – 19:19टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:19 – 20:34शुभ
अमृत20:34 – 21:50शुभ
चर21:50 – 23:05सामान्य
रोग23:05 – 00:21टालें
काल00:21 – 01:36टालें
लाभ01:36 – 02:51शुभ
उद्वेग02:51 – 04:07टालें
शुभ04:07 – 05:22शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2206:32दिन
शुक्र06:3207:42दिन
बुध07:4208:51दिन
चंद्र08:5110:01दिन
शनि10:0111:11दिन
गुरु11:1112:21दिन
मंगल12:2113:30दिन
सूर्य13:3014:40दिन
शुक्र14:4015:50दिन
बुध15:5016:59दिन
चंद्र16:5918:09दिन
शनि18:0919:19दिन
गुरु19:1920:09रात
मंगल20:0920:59रात
सूर्य20:5921:50रात
शुक्र21:5022:40रात
बुध22:4023:30रात
चंद्र23:3000:21रात
शनि00:2101:11रात
गुरु01:1102:01रात
मंगल02:0102:51रात
सूर्य02:5103:42रात
शुक्र03:4204:32रात
बुध04:3205:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 जून 2005मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2005शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जून 2005प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जून 2005ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
25 जून 2005संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 जून 2005कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 जुल॰ 2005कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 जुल॰ 2005प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 जुल॰ 2005आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
10 जुल॰ 2005विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9331° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।