8 फ़रवरी 2007 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2007, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2007 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (23:54 तक), नक्षत्र चित्रा (21:55 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 07:05 पर और सूर्यास्त 18:05 पर है। राहुकाल 13:58 से 15:20 तक है।

दिन और रात
दिन 07:05 – 18:05
रात 07:04 तक
तिथि
षष्ठी, 23:54 तक
सप्तमी
नक्षत्र
चित्रा, 21:55 तक
स्वाति
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 फ़रवरी 2007 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 23:54 तक
कृष्ण सप्तमी 02:18, 10 फ़र॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 21:55 तक
स्वाति 00:47, 10 फ़र॰ तक
योग
शूलअशुभ 17:45 तक
गंडअशुभ 18:34, 9 फ़र॰ तक
करण
गर 10:36 तक
वणिज 23:54 तक
विष्टि (भद्रा) 13:09, 9 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 08:23 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:05
सूर्यास्त
18:05
चंद्रोदय
23:34
चंद्रास्त
10:08
दिनमान
11h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2063
शक संवत
1928, व्यय संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:21 – 06:13
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
13:58 – 15:20
यमगंड
07:05 – 08:27
गुलिक काल
09:50 – 11:12

8 फ़रवरी 2007 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:05 – 08:27शुभ
रोग08:27 – 09:50टालें
उद्वेग09:50 – 11:12टालें
चर11:12 – 12:35सामान्य
लाभ12:35 – 13:58शुभ
अमृत13:58 – 15:20शुभ
काल15:20 – 16:43टालें
शुभ16:43 – 18:05शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:05 – 19:43शुभ
चर19:43 – 21:20सामान्य
रोग21:20 – 22:57टालें
काल22:57 – 00:35टालें
लाभ00:35 – 02:12शुभ
उद्वेग02:12 – 03:49टालें
शुभ03:49 – 05:27शुभ
अमृत05:27 – 07:04शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:0508:00दिन
मंगल08:0008:55दिन
सूर्य08:5509:50दिन
शुक्र09:5010:45दिन
बुध10:4511:40दिन
चंद्र11:4012:35दिन
शनि12:3513:30दिन
गुरु13:3014:25दिन
मंगल14:2515:20दिन
सूर्य15:2016:15दिन
शुक्र16:1517:10दिन
बुध17:1018:05दिन
चंद्र18:0519:10रात
शनि19:1020:15रात
गुरु20:1521:20रात
मंगल21:2022:25रात
सूर्य22:2523:30रात
शुक्र23:3000:35रात
बुध00:3501:40रात
चंद्र01:4002:44रात
शनि02:4403:49रात
गुरु03:4904:54रात
मंगल04:5405:59रात
सूर्य05:5907:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 फ़र॰ 2007कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2007कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2007कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2007प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2007फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2007विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 फ़र॰ 2007शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2007प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 मार्च 2007फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
8 मार्च 2007संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9563° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।