30 मई 2007 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 30 मई 2007, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 30 मई 2007 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (05:02, 31 मई तक), नक्षत्र विशाखा (05:16, 31 मई तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:24 पर और सूर्यास्त 19:13 पर है। राहुकाल 12:18 से 14:02 तक है।

दिन और रात
दिन 05:24 – 19:13
रात 05:24 तक
तिथि
चतुर्दशी, 05:02 तक
नक्षत्र
विशाखा, 05:16 तक
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 मई 2007 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 05:02, 31 मई तक
पूर्णिमा 06:33, 1 जून तक
नक्षत्र
विशाखा 05:16, 31 मई तक
अनुराधा 07:24, 1 जून तक
योग
परिघअशुभ 19:41 तक
शिव 20:03, 31 मई तक
करण
गर 16:08 तक
वणिज 05:02, 31 मई तक
विष्टि (भद्रा) 17:51, 31 मई तक
चंद्र राशि
तुला 22:41 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:24
सूर्यास्त
19:13
चंद्रोदय
17:55
चंद्रास्त
03:48
दिनमान
13h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
अधिक ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2064
शक संवत
1929, सर्वजित संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:46 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:18 – 14:02
यमगंड
07:07 – 08:51
गुलिक काल
10:35 – 12:18

30 मई 2007 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:24 – 07:07शुभ
अमृत07:07 – 08:51शुभ
काल08:51 – 10:35टालें
शुभ10:35 – 12:18शुभ
रोग12:18 – 14:02टालें
उद्वेग14:02 – 15:45टालें
चर15:45 – 17:29सामान्य
लाभ17:29 – 19:13शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:13 – 20:29टालें
शुभ20:29 – 21:45शुभ
अमृत21:45 – 23:02शुभ
चर23:02 – 00:18सामान्य
रोग00:18 – 01:34टालें
काल01:34 – 02:51टालें
लाभ02:51 – 04:07शुभ
उद्वेग04:07 – 05:24टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2406:33दिन
चंद्र06:3307:42दिन
शनि07:4208:51दिन
गुरु08:5110:00दिन
मंगल10:0011:09दिन
सूर्य11:0912:18दिन
शुक्र12:1813:27दिन
बुध13:2714:36दिन
चंद्र14:3615:45दिन
शनि15:4516:55दिन
गुरु16:5518:04दिन
मंगल18:0419:13दिन
सूर्य19:1320:04रात
शुक्र20:0420:54रात
बुध20:5421:45रात
चंद्र21:4522:36रात
शनि22:3623:27रात
गुरु23:2700:18रात
मंगल00:1801:09रात
सूर्य01:0902:00रात
शुक्र02:0002:51रात
बुध02:5103:42रात
चंद्र03:4204:33रात
शनि04:3305:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 मई 2007अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
5 जून 2007संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 जून 2007कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 जून 2007कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 जून 2007प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 जून 2007अधिक ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2007मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2007विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 जून 2007शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जून 2007प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9605° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।