15 जुलाई 2007 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 15 जुलाई 2007, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 15 जुलाई 2007 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (16:26 तक), नक्षत्र पुष्य (03:18, 16 जुल॰ तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:32 पर और सूर्यास्त 19:20 पर है। राहुकाल 17:37 से 19:20 तक है।

दिन और रात
दिन 05:32 – 19:20
रात 05:33 तक
तिथि
प्रतिपदा, 16:26 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पुष्य, 03:18 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 जुलाई 2007 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 16:26 तक
शुक्ल द्वितीया 15:55, 16 जुल॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 03:18, 16 जुल॰ तक
आश्लेषा 03:49, 17 जुल॰ तक
योग
हर्षण 12:05 तक
वज्रअशुभ 10:33, 16 जुल॰ तक
करण
बव 16:26 तक
बालव 04:05, 16 जुल॰ तक
कौलव 15:55, 16 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:32
सूर्यास्त
19:20
चंद्रोदय
06:03
चंद्रास्त
20:16
दिनमान
13h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2064
शक संवत
1929, सर्वजित संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
17:37 – 19:20
यमगंड
12:26 – 14:10
गुलिक काल
15:53 – 17:37

15 जुलाई 2007 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:32 – 07:16टालें
चर07:16 – 08:59सामान्य
लाभ08:59 – 10:43शुभ
अमृत10:43 – 12:26शुभ
काल12:26 – 14:10टालें
शुभ14:10 – 15:53शुभ
रोग15:53 – 17:37टालें
उद्वेग17:37 – 19:20टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:20 – 20:37शुभ
अमृत20:37 – 21:54शुभ
चर21:54 – 23:10सामान्य
रोग23:10 – 00:27टालें
काल00:27 – 01:43टालें
लाभ01:43 – 03:00शुभ
उद्वेग03:00 – 04:16टालें
शुभ04:16 – 05:33शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3206:41दिन
शुक्र06:4107:50दिन
बुध07:5008:59दिन
चंद्र08:5910:08दिन
शनि10:0811:17दिन
गुरु11:1712:26दिन
मंगल12:2613:35दिन
सूर्य13:3514:44दिन
शुक्र14:4415:53दिन
बुध15:5317:02दिन
चंद्र17:0218:11दिन
शनि18:1119:20दिन
गुरु19:2020:12रात
मंगल20:1221:03रात
सूर्य21:0321:54रात
शुक्र21:5422:45रात
बुध22:4523:36रात
चंद्र23:3600:27रात
शनि00:2701:18रात
गुरु01:1802:09रात
मंगल02:0903:00रात
सूर्य03:0003:51रात
शुक्र03:5104:42रात
बुध04:4205:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 जुल॰ 2007कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2007विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जुल॰ 2007शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जुल॰ 2007प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जुल॰ 2007आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2007संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2007कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अग॰ 2007कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अग॰ 2007प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अग॰ 2007श्रावण अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9623° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।