22 अगस्त 2007 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 22 अगस्त 2007, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 22 अगस्त 2007 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (20:03 तक), नक्षत्र अनुराधा (07:19 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:53 पर और सूर्यास्त 18:54 पर है। राहुकाल 12:23 से 14:01 तक है।

दिन और रात
दिन 05:53 – 18:54
रात 05:54 तक
तिथि
नवमी, 20:03 तक
दशमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अगस्त 2007 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल नवमी 20:03 तक
शुक्ल दशमी 21:05, 23 अग॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 09:17, 23 अग॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 23:03 तक
विष्कंभअशुभ 22:50, 23 अग॰ तक
करण
बालव 07:18 तक
कौलव 20:03 तक
तैतिल 08:39, 23 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:53
सूर्यास्त
18:54
चंद्रोदय
14:15
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
13h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2064
शक संवत
1929, सर्वजित संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:49 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:23 – 14:01
यमगंड
07:31 – 09:08
गुलिक काल
10:46 – 12:23

22 अगस्त 2007 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:53 – 07:31शुभ
अमृत07:31 – 09:08शुभ
काल09:08 – 10:46टालें
शुभ10:46 – 12:23शुभ
रोग12:23 – 14:01टालें
उद्वेग14:01 – 15:39टालें
चर15:39 – 17:16सामान्य
लाभ17:16 – 18:54शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:54 – 20:16टालें
शुभ20:16 – 21:39शुभ
अमृत21:39 – 23:01शुभ
चर23:01 – 00:24सामान्य
रोग00:24 – 01:46टालें
काल01:46 – 03:09टालें
लाभ03:09 – 04:31शुभ
उद्वेग04:31 – 05:54टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5306:58दिन
चंद्र06:5808:03दिन
शनि08:0309:08दिन
गुरु09:0810:13दिन
मंगल10:1311:18दिन
सूर्य11:1812:23दिन
शुक्र12:2313:29दिन
बुध13:2914:34दिन
चंद्र14:3415:39दिन
शनि15:3916:44दिन
गुरु16:4417:49दिन
मंगल17:4918:54दिन
सूर्य18:5419:49रात
शुक्र19:4920:44रात
बुध20:4421:39रात
चंद्र21:3922:34रात
शनि22:3423:29रात
गुरु23:2900:24रात
मंगल00:2401:19रात
सूर्य01:1902:14रात
शुक्र02:1403:09रात
बुध03:0904:04रात
चंद्र04:0404:59रात
शनि04:5905:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 अग॰ 2007शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अग॰ 2007प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 अग॰ 2007श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
31 अग॰ 2007संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 सित॰ 2007कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 सित॰ 2007कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 सित॰ 2007प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 सित॰ 2007भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
15 सित॰ 2007विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2007कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9637° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।