9 सितंबर 2007 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 9 सितंबर 2007, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 9 सितंबर 2007 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (16:11 तक), नक्षत्र आश्लेषा (19:11 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:02 पर और सूर्यास्त 18:34 पर है। राहुकाल 17:00 से 18:34 तक है।

दिन और रात
दिन 06:02 – 18:34
रात 06:03 तक
तिथि
त्रयोदशी, 16:11 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
आश्लेषा, 19:11 तक
मघा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 सितंबर 2007 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 16:11 तक
कृष्ण चतुर्दशी 16:59, 10 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 20:40, 10 सित॰ तक
योग
शिव 02:28, 10 सित॰ तक
सिद्ध 02:13, 11 सित॰ तक
करण
वणिज 16:11 तक
विष्टि (भद्रा) 04:32, 10 सित॰ तक
शकुनि 16:59, 10 सित॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 19:11 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:02
सूर्यास्त
18:34
चंद्रोदय
03:46
चंद्रास्त
17:24
दिनमान
12h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2064
शक संवत
1929, सर्वजित संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:31 – 05:17
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
17:00 – 18:34
यमगंड
12:18 – 13:52
गुलिक काल
15:26 – 17:00

9 सितंबर 2007 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:02 – 07:36टालें
चर07:36 – 09:10सामान्य
लाभ09:10 – 10:44शुभ
अमृत10:44 – 12:18शुभ
काल12:18 – 13:52टालें
शुभ13:52 – 15:26शुभ
रोग15:26 – 17:00टालें
उद्वेग17:00 – 18:34टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:34 – 20:00शुभ
अमृत20:00 – 21:26शुभ
चर21:26 – 22:52सामान्य
रोग22:52 – 00:18टालें
काल00:18 – 01:44टालें
लाभ01:44 – 03:11शुभ
उद्वेग03:11 – 04:37टालें
शुभ04:37 – 06:03शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0207:05दिन
शुक्र07:0508:08दिन
बुध08:0809:10दिन
चंद्र09:1010:13दिन
शनि10:1311:15दिन
गुरु11:1512:18दिन
मंगल12:1813:21दिन
सूर्य13:2114:23दिन
शुक्र14:2315:26दिन
बुध15:2616:28दिन
चंद्र16:2817:31दिन
शनि17:3118:34दिन
गुरु18:3419:31रात
मंगल19:3120:28रात
सूर्य20:2821:26रात
शुक्र21:2622:23रात
बुध22:2323:21रात
चंद्र23:2100:18रात
शनि00:1801:16रात
गुरु01:1602:13रात
मंगल02:1303:11रात
सूर्य03:1104:08रात
शुक्र04:0805:05रात
बुध05:0506:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 सित॰ 2007प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 सित॰ 2007भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
15 सित॰ 2007विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2007कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
23 सित॰ 2007शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
25 सित॰ 2007प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2007भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2007संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2007कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2007कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2007प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9644° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।