8 दिसंबर 2007 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 8 दिसंबर 2007, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 8 दिसंबर 2007 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (21:01 तक), नक्षत्र विशाखा (07:15 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 07:01 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है। राहुकाल 09:36 से 10:54 तक है।

दिन और रात
दिन 07:01 – 17:24
रात 07:01 तक
तिथि
चतुर्दशी, 21:01 तक
अमावस्या
नक्षत्र
अनुराधा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 दिसंबर 2007 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 21:01 तक
अमावस्या 23:10, 9 दिस॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 07:15 तक
अनुराधा 09:59, 9 दिस॰ तक
योग
सुकर्मा 22:48 तक
धृति 23:19, 9 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:51 तक
शकुनि 21:01 तक
चतुष्पद 10:07, 9 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:01
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
05:44
चंद्रास्त
16:07
दिनमान
10h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2064
शक संवत
1929, सर्वजित संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:12 – 06:06
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
09:36 – 10:54
यमगंड
13:30 – 14:48
गुलिक काल
07:01 – 08:19

8 दिसंबर 2007 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:01 – 08:19टालें
शुभ08:19 – 09:36शुभ
रोग09:36 – 10:54टालें
उद्वेग10:54 – 12:12टालें
चर12:12 – 13:30सामान्य
लाभ13:30 – 14:48शुभ
अमृत14:48 – 16:06शुभ
काल16:06 – 17:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:24 – 19:06शुभ
उद्वेग19:06 – 20:48टालें
शुभ20:48 – 22:30शुभ
अमृत22:30 – 00:13शुभ
चर00:13 – 01:55सामान्य
रोग01:55 – 03:37टालें
काल03:37 – 05:19टालें
लाभ05:19 – 07:01शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:0107:53दिन
गुरु07:5308:45दिन
मंगल08:4509:36दिन
सूर्य09:3610:28दिन
शुक्र10:2811:20दिन
बुध11:2012:12दिन
चंद्र12:1213:04दिन
शनि13:0413:56दिन
गुरु13:5614:48दिन
मंगल14:4815:40दिन
सूर्य15:4016:32दिन
शुक्र16:3217:24दिन
बुध17:2418:32रात
चंद्र18:3219:40रात
शनि19:4020:48रात
गुरु20:4821:56रात
मंगल21:5623:04रात
सूर्य23:0400:13रात
शुक्र00:1301:21रात
बुध01:2102:29रात
चंद्र02:2903:37रात
शनि03:3704:45रात
गुरु04:4505:53रात
मंगल05:5307:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 दिस॰ 2007मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
13 दिस॰ 2007विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2007धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2007शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2007प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 दिस॰ 2007मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2007संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2007कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 जन॰ 2008कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 जन॰ 2008प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9679° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।