8 फ़रवरी 2008 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2008, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2008 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (08:32 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (08:24 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 07:05 पर और सूर्यास्त 18:05 पर है। राहुकाल 11:12 से 12:35 तक है।

दिन और रात
दिन 07:05 – 18:05
रात 07:04 तक
तिथि
द्वितीया
नक्षत्र
शतभिषा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 फ़रवरी 2008 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 08:32 तक
शुक्ल द्वितीया 07:26, 9 फ़र॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 07:56, 9 फ़र॰ तक
योग
परिघअशुभ 04:01, 9 फ़र॰ तक
शिव 01:40, 10 फ़र॰ तक
करण
बव 08:32 तक
बालव 20:02 तक
कौलव 07:26, 9 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:05
सूर्यास्त
18:05
चंद्रोदय
07:45
चंद्रास्त
19:23
दिनमान
11h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2064
शक संवत
1929, सर्वजित संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:21 – 06:13
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
11:12 – 12:35
यमगंड
15:20 – 16:42
गुलिक काल
08:28 – 09:50

8 फ़रवरी 2008 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:05 – 08:28सामान्य
लाभ08:28 – 09:50शुभ
अमृत09:50 – 11:12शुभ
काल11:12 – 12:35टालें
शुभ12:35 – 13:57शुभ
रोग13:57 – 15:20टालें
उद्वेग15:20 – 16:42टालें
चर16:42 – 18:05सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:05 – 19:42टालें
काल19:42 – 21:20टालें
लाभ21:20 – 22:57शुभ
उद्वेग22:57 – 00:35टालें
शुभ00:35 – 02:12शुभ
अमृत02:12 – 03:49शुभ
चर03:49 – 05:27सामान्य
रोग05:27 – 07:04टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:0508:00दिन
बुध08:0008:55दिन
चंद्र08:5509:50दिन
शनि09:5010:45दिन
गुरु10:4511:40दिन
मंगल11:4012:35दिन
सूर्य12:3513:30दिन
शुक्र13:3014:25दिन
बुध14:2515:20दिन
चंद्र15:2016:15दिन
शनि16:1517:10दिन
गुरु17:1018:05दिन
मंगल18:0519:10रात
सूर्य19:1020:15रात
शुक्र20:1521:20रात
बुध21:2022:25रात
चंद्र22:2523:30रात
शनि23:3000:35रात
गुरु00:3501:40रात
मंगल01:4002:45रात
सूर्य02:4503:49रात
शुक्र03:4904:54रात
बुध04:5405:59रात
चंद्र05:5907:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 फ़र॰ 2008विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2008कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2008शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 फ़र॰ 2008प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 फ़र॰ 2008माघ पूर्णिमापूर्णिमा
25 फ़र॰ 2008संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 फ़र॰ 2008कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 मार्च 2008कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 मार्च 2008प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 मार्च 2008फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9702° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।