8 अगस्त 2008 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 8 अगस्त 2008, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 8 अगस्त 2008 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (12:51 तक), नक्षत्र स्वाति (20:31 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:46 पर और सूर्यास्त 19:06 पर है। राहुकाल 10:46 से 12:26 तक है।

दिन और रात
दिन 05:46 – 19:06
रात 05:47 तक
तिथि
सप्तमी, 12:51 तक
अष्टमी
नक्षत्र
स्वाति, 20:31 तक
विशाखा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 अगस्त 2008 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 12:51 तक
शुक्ल अष्टमी 14:54, 9 अग॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 20:31 तक
विशाखा 23:15, 9 अग॰ तक
योग
शुभ 09:53 तक
शुक्ल 10:30, 9 अग॰ तक
करण
वणिज 12:51 तक
विष्टि (भद्रा) 01:50, 9 अग॰ तक
बव 14:54, 9 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:46
सूर्यास्त
19:06
चंद्रोदय
12:20
चंद्रास्त
23:05
दिनमान
13h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2065
शक संवत
1930, सर्वधारी संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:04
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
10:46 – 12:26
यमगंड
15:46 – 17:26
गुलिक काल
07:26 – 09:06

8 अगस्त 2008 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:46 – 07:26सामान्य
लाभ07:26 – 09:06शुभ
अमृत09:06 – 10:46शुभ
काल10:46 – 12:26टालें
शुभ12:26 – 14:06शुभ
रोग14:06 – 15:46टालें
उद्वेग15:46 – 17:26टालें
चर17:26 – 19:06सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:06 – 20:26टालें
काल20:26 – 21:46टालें
लाभ21:46 – 23:06शुभ
उद्वेग23:06 – 00:26टालें
शुभ00:26 – 01:46शुभ
अमृत01:46 – 03:07शुभ
चर03:07 – 04:27सामान्य
रोग04:27 – 05:47टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4606:53दिन
बुध06:5307:59दिन
चंद्र07:5909:06दिन
शनि09:0610:13दिन
गुरु10:1311:19दिन
मंगल11:1912:26दिन
सूर्य12:2613:33दिन
शुक्र13:3314:39दिन
बुध14:3915:46दिन
चंद्र15:4616:53दिन
शनि16:5317:59दिन
गुरु17:5919:06दिन
मंगल19:0619:59रात
सूर्य19:5920:53रात
शुक्र20:5321:46रात
बुध21:4622:40रात
चंद्र22:4023:33रात
शनि23:3300:26रात
गुरु00:2601:20रात
मंगल01:2002:13रात
सूर्य02:1303:07रात
शुक्र03:0704:00रात
बुध04:0004:53रात
चंद्र04:5305:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 अग॰ 2008शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अग॰ 2008प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
16 अग॰ 2008श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
16 अग॰ 2008सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2008संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
24 अग॰ 2008कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
27 अग॰ 2008कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 अग॰ 2008प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 अग॰ 2008भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
3 सित॰ 2008विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9772° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।