17 मई 2009 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 17 मई 2009, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 17 मई 2009 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (01:45, 18 मई तक), नक्षत्र धनिष्ठा (21:04 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 19:06 पर है। राहुकाल 17:23 से 19:06 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 19:06
रात 05:28 तक
तिथि
अष्टमी, 01:45 तक
नवमी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 21:04 तक
शतभिषा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 मई 2009 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 01:45, 18 मई तक
कृष्ण नवमी 02:53, 19 मई तक
नक्षत्र
शतभिषा 22:57, 18 मई तक
योग
ब्रह्म 09:43 तक
इंद्र 10:00, 18 मई तक
करण
बालव 12:56 तक
कौलव 01:45, 18 मई तक
तैतिल 14:25, 18 मई तक
चंद्र राशि
मकर 07:53 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
19:06
चंद्रोदय
00:41
चंद्रास्त
12:06
दिनमान
13h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2066
शक संवत
1931, विरोधी संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:06 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
17:23 – 19:06
यमगंड
12:17 – 13:59
गुलिक काल
15:41 – 17:23

17 मई 2009 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:29 – 07:11टालें
चर07:11 – 08:53सामान्य
लाभ08:53 – 10:35शुभ
अमृत10:35 – 12:17शुभ
काल12:17 – 13:59टालें
शुभ13:59 – 15:41शुभ
रोग15:41 – 17:23टालें
उद्वेग17:23 – 19:06टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:06 – 20:23शुभ
अमृत20:23 – 21:41शुभ
चर21:41 – 22:59सामान्य
रोग22:59 – 00:17टालें
काल00:17 – 01:35टालें
लाभ01:35 – 02:53शुभ
उद्वेग02:53 – 04:10टालें
शुभ04:10 – 05:28शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2906:37दिन
शुक्र06:3707:45दिन
बुध07:4508:53दिन
चंद्र08:5310:01दिन
शनि10:0111:09दिन
गुरु11:0912:17दिन
मंगल12:1713:25दिन
सूर्य13:2514:33दिन
शुक्र14:3315:41दिन
बुध15:4116:49दिन
चंद्र16:4917:57दिन
शनि17:5719:06दिन
गुरु19:0619:57रात
मंगल19:5720:49रात
सूर्य20:4921:41रात
शुक्र21:4122:33रात
बुध22:3323:25रात
चंद्र23:2500:17रात
शनि00:1701:09रात
गुरु01:0902:01रात
मंगल02:0102:53रात
सूर्य02:5303:45रात
शुक्र03:4504:36रात
बुध04:3605:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 मई 2009कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 मई 2009कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 मई 2009प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 मई 2009ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
27 मई 2009विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 जून 2009शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 जून 2009प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 जून 2009ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
12 जून 2009संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जून 2009मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9880° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।