3 जुलाई 2009 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 3 जुलाई 2009, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 3 जुलाई 2009 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (06:27 तक), नक्षत्र विशाखा (14:25 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:27 पर और सूर्यास्त 19:22 पर है। राहुकाल 10:40 से 12:25 तक है।

दिन और रात
दिन 05:27 – 19:22
रात 05:28 तक
तिथि
द्वादशी
नक्षत्र
विशाखा, 14:25 तक
अनुराधा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 जुलाई 2009 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 06:27 तक
शुक्ल द्वादशी 08:04, 4 जुल॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 14:25 तक
अनुराधा 16:47, 4 जुल॰ तक
योग
साध्य 18:50 तक
शुभ 19:20, 4 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:27 तक
बव 19:12 तक
बालव 08:04, 4 जुल॰ तक
चंद्र राशि
तुला 07:53 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:27
सूर्यास्त
19:22
चंद्रोदय
16:11
चंद्रास्त
01:52
दिनमान
13h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2066
शक संवत
1931, विरोधी संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
10:40 – 12:25
यमगंड
15:54 – 17:38
गुलिक काल
07:12 – 08:56

3 जुलाई 2009 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:27 – 07:12सामान्य
लाभ07:12 – 08:56शुभ
अमृत08:56 – 10:40शुभ
काल10:40 – 12:25टालें
शुभ12:25 – 14:09शुभ
रोग14:09 – 15:54टालें
उद्वेग15:54 – 17:38टालें
चर17:38 – 19:22सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:22 – 20:38टालें
काल20:38 – 21:54टालें
लाभ21:54 – 23:09शुभ
उद्वेग23:09 – 00:25टालें
शुभ00:25 – 01:41शुभ
अमृत01:41 – 02:56शुभ
चर02:56 – 04:12सामान्य
रोग04:12 – 05:28टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2706:37दिन
बुध06:3707:46दिन
चंद्र07:4608:56दिन
शनि08:5610:06दिन
गुरु10:0611:15दिन
मंगल11:1512:25दिन
सूर्य12:2513:34दिन
शुक्र13:3414:44दिन
बुध14:4415:54दिन
चंद्र15:5417:03दिन
शनि17:0318:13दिन
गुरु18:1319:22दिन
मंगल19:2220:13रात
सूर्य20:1321:03रात
शुक्र21:0321:54रात
बुध21:5422:44रात
चंद्र22:4423:35रात
शनि23:3500:25रात
गुरु00:2501:15रात
मंगल01:1502:06रात
सूर्य02:0602:56रात
शुक्र02:5603:47रात
बुध03:4704:37रात
चंद्र04:3705:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 जुल॰ 2009प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 जुल॰ 2009आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
11 जुल॰ 2009संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जुल॰ 2009कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 जुल॰ 2009कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2009कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जुल॰ 2009प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जुल॰ 2009श्रावण अमावस्याअमावस्या
25 जुल॰ 2009विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 अग॰ 2009शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9898° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।