9 अक्टूबर 2009 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2009, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2009 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (06:57 तक), नक्षत्र रोहिणी (09:26 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:18 पर और सूर्यास्त 17:58 पर है। राहुकाल 10:40 से 12:08 तक है।

दिन और रात
दिन 06:18 – 17:58
रात 06:18 तक
तिथि
षष्ठी, 05:15 तक
नक्षत्र
रोहिणी, 09:26 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अक्टूबर 2009 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 06:57 तक
कृष्ण षष्ठी 05:15, 10 अक्टू॰ तक
कृष्ण सप्तमी 03:24, 11 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 09:26 तक
मृगशिरा 08:26, 10 अक्टू॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 11:35 तक
वरीयान 09:03, 10 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 06:57 तक
गर 18:07 तक
वणिज 05:15, 10 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 16:20, 10 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 20:57 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:18
सूर्यास्त
17:58
चंद्रोदय
21:41
चंद्रास्त
11:18
दिनमान
11h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2066
शक संवत
1931, विरोधी संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:39 – 05:29
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
10:40 – 12:08
यमगंड
15:03 – 16:30
गुलिक काल
07:45 – 09:13

9 अक्टूबर 2009 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:18 – 07:45सामान्य
लाभ07:45 – 09:13शुभ
अमृत09:13 – 10:40शुभ
काल10:40 – 12:08टालें
शुभ12:08 – 13:35शुभ
रोग13:35 – 15:03टालें
उद्वेग15:03 – 16:30टालें
चर16:30 – 17:58सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:58 – 19:30टालें
काल19:30 – 21:03टालें
लाभ21:03 – 22:35शुभ
उद्वेग22:35 – 00:08टालें
शुभ00:08 – 01:41शुभ
अमृत01:41 – 03:13शुभ
चर03:13 – 04:46सामान्य
रोग04:46 – 06:18टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:1807:16दिन
बुध07:1608:15दिन
चंद्र08:1509:13दिन
शनि09:1310:11दिन
गुरु10:1111:09दिन
मंगल11:0912:08दिन
सूर्य12:0813:06दिन
शुक्र13:0614:04दिन
बुध14:0415:03दिन
चंद्र15:0316:01दिन
शनि16:0116:59दिन
गुरु16:5917:58दिन
मंगल17:5818:59रात
सूर्य18:5920:01रात
शुक्र20:0121:03रात
बुध21:0322:05रात
चंद्र22:0523:06रात
शनि23:0600:08रात
गुरु00:0801:10रात
मंगल01:1002:12रात
सूर्य02:1203:13रात
शुक्र03:1304:15रात
बुध04:1505:17रात
चंद्र05:1706:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अक्टू॰ 2009कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2009कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2009प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2009तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2009कार्तिक अमावस्याअमावस्या
22 अक्टू॰ 2009विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 अक्टू॰ 2009शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2009प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2009कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2009संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9935° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।