20 दिसंबर 2010 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 20 दिसंबर 2010, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 20 दिसंबर 2010 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (14:48 तक), नक्षत्र रोहिणी (16:32 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 07:08 पर और सूर्यास्त 17:28 पर है। राहुकाल 08:26 से 09:43 तक है।

दिन और रात
दिन 07:08 – 17:28
रात 07:09 तक
तिथि
चतुर्दशी, 14:48 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
रोहिणी, 16:32 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 दिसंबर 2010 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 14:48 तक
पूर्णिमा 13:43, 21 दिस॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 16:32 तक
मृगशिरा 16:03, 21 दिस॰ तक
योग
साध्य 09:10 तक
शुभ 07:12, 21 दिस॰ तक
करण
वणिज 14:48 तक
विष्टि (भद्रा) 02:19, 21 दिस॰ तक
बव 13:43, 21 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 04:21, 21 दिस॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:08
सूर्यास्त
17:28
चंद्रोदय
16:33
चंद्रास्त
06:01
दिनमान
10h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2067
शक संवत
1932, विकृति संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:19 – 06:14
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
08:26 – 09:43
यमगंड
11:01 – 12:18
गुलिक काल
13:36 – 14:53

20 दिसंबर 2010 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:08 – 08:26शुभ
काल08:26 – 09:43टालें
शुभ09:43 – 11:01शुभ
रोग11:01 – 12:18टालें
उद्वेग12:18 – 13:36टालें
चर13:36 – 14:53सामान्य
लाभ14:53 – 16:10शुभ
अमृत16:10 – 17:28शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:28 – 19:10सामान्य
रोग19:10 – 20:53टालें
काल20:53 – 22:36टालें
लाभ22:36 – 00:18शुभ
उद्वेग00:18 – 02:01टालें
शुभ02:01 – 03:44शुभ
अमृत03:44 – 05:26शुभ
चर05:26 – 07:09सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:0808:00दिन
शनि08:0008:52दिन
गुरु08:5209:43दिन
मंगल09:4310:35दिन
सूर्य10:3511:26दिन
शुक्र11:2612:18दिन
बुध12:1813:10दिन
चंद्र13:1014:01दिन
शनि14:0114:53दिन
गुरु14:5315:45दिन
मंगल15:4516:36दिन
सूर्य16:3617:28दिन
शुक्र17:2818:36रात
बुध18:3619:45रात
चंद्र19:4520:53रात
शनि20:5322:01रात
गुरु22:0123:10रात
मंगल23:1000:18रात
सूर्य00:1801:27रात
शुक्र01:2702:35रात
बुध02:3503:44रात
चंद्र03:4404:52रात
शनि04:5206:01रात
गुरु06:0107:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 दिस॰ 2010मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
24 दिस॰ 2010संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2010कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 दिस॰ 2010कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जन॰ 2011प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जन॰ 2011पौष अमावस्याअमावस्या
8 जन॰ 2011विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2011मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2011शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 जन॰ 2011प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0102° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।