28 जनवरी 2011 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 28 जनवरी 2011, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 28 जनवरी 2011 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (04:04, 29 जन॰ तक), नक्षत्र विशाखा (07:39 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 07:11 पर और सूर्यास्त 17:56 पर है। राहुकाल 11:13 से 12:34 तक है।

दिन और रात
दिन 07:11 – 17:56
रात 07:11 तक
तिथि
दशमी, 04:04 तक
एकादशी
नक्षत्र
अनुराधा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 जनवरी 2011 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण दशमी 04:04, 29 जन॰ तक
कृष्ण एकादशी 04:00, 30 जन॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 07:39 तक
अनुराधा 07:46, 29 जन॰ तक
योग
वृद्धि 23:40 तक
ध्रुव 22:20, 29 जन॰ तक
करण
वणिज 16:17 तक
विष्टि (भद्रा) 04:04, 29 जन॰ तक
बव 15:59, 29 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:11
सूर्यास्त
17:56
चंद्रोदय
02:09
चंद्रास्त
12:47
दिनमान
10h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2067
शक संवत
1932, विकृति संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:25 – 06:18
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
11:13 – 12:34
यमगंड
15:15 – 16:36
गुलिक काल
08:32 – 09:52

28 जनवरी 2011 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:11 – 08:32सामान्य
लाभ08:32 – 09:52शुभ
अमृत09:52 – 11:13शुभ
काल11:13 – 12:34टालें
शुभ12:34 – 13:54शुभ
रोग13:54 – 15:15टालें
उद्वेग15:15 – 16:36टालें
चर16:36 – 17:56सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:56 – 19:36टालें
काल19:36 – 21:15टालें
लाभ21:15 – 22:54शुभ
उद्वेग22:54 – 00:33टालें
शुभ00:33 – 02:13शुभ
अमृत02:13 – 03:52शुभ
चर03:52 – 05:31सामान्य
रोग05:31 – 07:11टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:1108:05दिन
बुध08:0508:59दिन
चंद्र08:5909:52दिन
शनि09:5210:46दिन
गुरु10:4611:40दिन
मंगल11:4012:34दिन
सूर्य12:3413:27दिन
शुक्र13:2714:21दिन
बुध14:2115:15दिन
चंद्र15:1516:09दिन
शनि16:0917:02दिन
गुरु17:0217:56दिन
मंगल17:5619:02रात
सूर्य19:0220:09रात
शुक्र20:0921:15रात
बुध21:1522:21रात
चंद्र22:2123:27रात
शनि23:2700:33रात
गुरु00:3301:40रात
मंगल01:4002:46रात
सूर्य02:4603:52रात
शुक्र03:5204:58रात
बुध04:5806:04रात
चंद्र06:0407:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जन॰ 2011कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जन॰ 2011प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2011माघ अमावस्याअमावस्या
7 फ़र॰ 2011विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2011कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2011शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 फ़र॰ 2011प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
18 फ़र॰ 2011माघ पूर्णिमापूर्णिमा
21 फ़र॰ 2011संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 फ़र॰ 2011कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0117° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।