27 अप्रैल 2011 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 27 अप्रैल 2011, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 27 अप्रैल 2011 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (00:54, 28 अप्रैल तक), नक्षत्र धनिष्ठा (11:50 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:44 पर और सूर्यास्त 18:53 पर है। राहुकाल 12:19 से 13:57 तक है।

दिन और रात
दिन 05:44 – 18:53
रात 05:43 तक
तिथि
दशमी, 00:54 तक
एकादशी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 11:50 तक
शतभिषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 अप्रैल 2011 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण दशमी 00:54, 28 अप्रैल तक
कृष्ण एकादशी 03:19, 29 अप्रैल तक
नक्षत्र
शतभिषा 14:41, 28 अप्रैल तक
योग
शुक्ल 13:06 तक
ब्रह्म 13:57, 28 अप्रैल तक
करण
वणिज 11:46 तक
विष्टि (भद्रा) 00:54, 28 अप्रैल तक
बव 14:06, 28 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:44
सूर्यास्त
18:53
चंद्रोदय
02:08
चंद्रास्त
13:54
दिनमान
13h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2068
शक संवत
1933, खर संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 05:01
अभिजीत मुहूर्त
11:52 – 12:45 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:19 – 13:57
यमगंड
07:23 – 09:01
गुलिक काल
10:40 – 12:19

27 अप्रैल 2011 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:44 – 07:23शुभ
अमृत07:23 – 09:01शुभ
काल09:01 – 10:40टालें
शुभ10:40 – 12:19शुभ
रोग12:19 – 13:57टालें
उद्वेग13:57 – 15:36टालें
चर15:36 – 17:15सामान्य
लाभ17:15 – 18:53शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:53 – 20:14टालें
शुभ20:14 – 21:36शुभ
अमृत21:36 – 22:57शुभ
चर22:57 – 00:18सामान्य
रोग00:18 – 01:39टालें
काल01:39 – 03:01टालें
लाभ03:01 – 04:22शुभ
उद्वेग04:22 – 05:43टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4406:50दिन
चंद्र06:5007:56दिन
शनि07:5609:01दिन
गुरु09:0110:07दिन
मंगल10:0711:13दिन
सूर्य11:1312:19दिन
शुक्र12:1913:24दिन
बुध13:2414:30दिन
चंद्र14:3015:36दिन
शनि15:3616:42दिन
गुरु16:4217:47दिन
मंगल17:4718:53दिन
सूर्य18:5319:47रात
शुक्र19:4720:41रात
बुध20:4121:36रात
चंद्र21:3622:30रात
शनि22:3023:24रात
गुरु23:2400:18रात
मंगल00:1801:12रात
सूर्य01:1202:06रात
शुक्र02:0603:01रात
बुध03:0103:55रात
चंद्र03:5504:49रात
शनि04:4905:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 अप्रैल 2011कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
1 मई 2011प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
3 मई 2011वैशाख अमावस्याअमावस्या
7 मई 2011विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 मई 2011शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 मई 2011प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 मई 2011वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मई 2011वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
21 मई 2011संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 मई 2011कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0151° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।