22 मई 2012 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 22 मई 2012, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 22 मई 2012 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (07:43 तक), नक्षत्र रोहिणी (15:43 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:26 पर और सूर्यास्त 19:09 पर है। राहुकाल 15:43 से 17:26 तक है।

दिन और रात
दिन 05:26 – 19:09
रात 05:26 तक
तिथि
द्वितीया
नक्षत्र
रोहिणी, 15:43 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 मई 2012 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 07:43 तक
शुक्ल द्वितीया 09:56, 23 मई तक
नक्षत्र
रोहिणी 15:43 तक
मृगशिरा 18:24, 23 मई तक
योग
सुकर्मा 20:01 तक
धृति 20:42, 23 मई तक
करण
बव 07:43 तक
बालव 20:52 तक
कौलव 09:56, 23 मई तक
चंद्र राशि
वृषभ 05:06, 23 मई तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:26
सूर्यास्त
19:09
चंद्रोदय
06:16
चंद्रास्त
20:23
दिनमान
13h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:04 – 04:45
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
15:43 – 17:26
यमगंड
08:52 – 10:35
गुलिक काल
12:17 – 14:00

22 मई 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:26 – 07:09टालें
उद्वेग07:09 – 08:52टालें
चर08:52 – 10:35सामान्य
लाभ10:35 – 12:17शुभ
अमृत12:17 – 14:00शुभ
काल14:00 – 15:43टालें
शुभ15:43 – 17:26शुभ
रोग17:26 – 19:09टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:09 – 20:26टालें
लाभ20:26 – 21:43शुभ
उद्वेग21:43 – 23:00टालें
शुभ23:00 – 00:17शुभ
अमृत00:17 – 01:34शुभ
चर01:34 – 02:52सामान्य
रोग02:52 – 04:09टालें
काल04:09 – 05:26टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:2606:35दिन
सूर्य06:3507:43दिन
शुक्र07:4308:52दिन
बुध08:5210:00दिन
चंद्र10:0011:09दिन
शनि11:0912:17दिन
गुरु12:1713:26दिन
मंगल13:2614:35दिन
सूर्य14:3515:43दिन
शुक्र15:4316:52दिन
बुध16:5218:00दिन
चंद्र18:0019:09दिन
शनि19:0920:00रात
गुरु20:0020:52रात
मंगल20:5221:43रात
सूर्य21:4322:34रात
शुक्र22:3423:26रात
बुध23:2600:17रात
चंद्र00:1701:09रात
शनि01:0902:00रात
गुरु02:0002:52रात
मंगल02:5203:43रात
सूर्य03:4304:34रात
शुक्र04:3405:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 मई 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 जून 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
2 जून 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 जून 2012ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
8 जून 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जून 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जून 2012मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
15 जून 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 जून 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 जून 2012आषाढ़ अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0301° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।