25 अगस्त 2012 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 25 अगस्त 2012, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 25 अगस्त 2012 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (06:20 तक), नक्षत्र अनुराधा (10:32 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:55 पर और सूर्यास्त 18:50 पर है। राहुकाल 09:09 से 10:46 तक है।

दिन और रात
दिन 05:55 – 18:50
रात 05:56 तक
तिथि
नवमी, 04:18 तक
दशमी
नक्षत्र
अनुराधा, 10:32 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 अगस्त 2012 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 06:20 तक
शुक्ल नवमी 04:18, 26 अग॰ तक
शुक्ल दशमी 02:20, 27 अग॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 09:16, 26 अग॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 18:27 तक
विष्कंभअशुभ 15:45, 26 अग॰ तक
करण
बव 06:20 तक
बालव 17:19 तक
कौलव 04:18, 26 अग॰ तक
तैतिल 15:18, 26 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:55
सूर्यास्त
18:50
चंद्रोदय
13:39
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
अधिक भाद्रपद
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:27 – 05:11
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:48

अशुभ समय

राहुकाल
09:09 – 10:46
यमगंड
13:59 – 15:36
गुलिक काल
05:55 – 07:32

25 अगस्त 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:55 – 07:32टालें
शुभ07:32 – 09:09शुभ
रोग09:09 – 10:46टालें
उद्वेग10:46 – 12:22टालें
चर12:22 – 13:59सामान्य
लाभ13:59 – 15:36शुभ
अमृत15:36 – 17:13शुभ
काल17:13 – 18:50टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:50 – 20:13शुभ
उद्वेग20:13 – 21:36टालें
शुभ21:36 – 22:59शुभ
अमृत22:59 – 00:23शुभ
चर00:23 – 01:46सामान्य
रोग01:46 – 03:09टालें
काल03:09 – 04:33टालें
लाभ04:33 – 05:56शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5507:00दिन
गुरु07:0008:04दिन
मंगल08:0409:09दिन
सूर्य09:0910:13दिन
शुक्र10:1311:18दिन
बुध11:1812:22दिन
चंद्र12:2213:27दिन
शनि13:2714:32दिन
गुरु14:3215:36दिन
मंगल15:3616:41दिन
सूर्य16:4117:45दिन
शुक्र17:4518:50दिन
बुध18:5019:45रात
चंद्र19:4520:41रात
शनि20:4121:36रात
गुरु21:3622:32रात
मंगल22:3223:27रात
सूर्य23:2700:23रात
शुक्र00:2301:18रात
बुध01:1802:14रात
चंद्र02:1403:09रात
शनि03:0904:05रात
गुरु04:0505:00रात
मंगल05:0005:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 अग॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 अग॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 अग॰ 2012अधिक भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
4 सित॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 सित॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 सित॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 सित॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 सित॰ 2012अधिक भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
16 सित॰ 2012कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0337° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।