18 दिसंबर 2012 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 18 दिसंबर 2012, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 18 दिसंबर 2012 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (22:41 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (07:33 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 07:08 पर और सूर्यास्त 17:27 पर है। राहुकाल 14:52 से 16:10 तक है।

दिन और रात
दिन 07:08 – 17:27
रात 07:08 तक
तिथि
षष्ठी, 22:41 तक
सप्तमी
नक्षत्र
शतभिषा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 दिसंबर 2012 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 22:41 तक
शुक्ल सप्तमी 22:33, 19 दिस॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 07:29, 19 दिस॰ तक
योग
वज्रअशुभ 01:31, 19 दिस॰ तक
सिद्धि 00:16, 20 दिस॰ तक
करण
कौलव 11:05 तक
तैतिल 22:41 तक
गर 10:31, 19 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:08
सूर्यास्त
17:27
चंद्रोदय
10:56
चंद्रास्त
22:58
दिनमान
10h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:18 – 06:13
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
14:52 – 16:10
यमगंड
09:42 – 11:00
गुलिक काल
12:17 – 13:35

18 दिसंबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:08 – 08:25टालें
उद्वेग08:25 – 09:42टालें
चर09:42 – 11:00सामान्य
लाभ11:00 – 12:17शुभ
अमृत12:17 – 13:35शुभ
काल13:35 – 14:52टालें
शुभ14:52 – 16:10शुभ
रोग16:10 – 17:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:27 – 19:10टालें
लाभ19:10 – 20:52शुभ
उद्वेग20:52 – 22:35टालें
शुभ22:35 – 00:18शुभ
अमृत00:18 – 02:00शुभ
चर02:00 – 03:43सामान्य
रोग03:43 – 05:26टालें
काल05:26 – 07:08टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:0807:59दिन
सूर्य07:5908:51दिन
शुक्र08:5109:42दिन
बुध09:4210:34दिन
चंद्र10:3411:26दिन
शनि11:2612:17दिन
गुरु12:1713:09दिन
मंगल13:0914:01दिन
सूर्य14:0114:52दिन
शुक्र14:5215:44दिन
बुध15:4416:35दिन
चंद्र16:3517:27दिन
शनि17:2718:36रात
गुरु18:3619:44रात
मंगल19:4420:52रात
सूर्य20:5222:01रात
शुक्र22:0123:09रात
बुध23:0900:18रात
चंद्र00:1801:26रात
शनि01:2602:34रात
गुरु02:3403:43रात
मंगल03:4304:51रात
सूर्य04:5106:00रात
शुक्र06:0007:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 दिस॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 दिस॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 दिस॰ 2012मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
1 जन॰ 2013संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 जन॰ 2013कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 जन॰ 2013कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 जन॰ 2013प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 जन॰ 2013पौष अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2013मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2013विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0381° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।