5 जनवरी 2013 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 5 जनवरी 2013, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 5 जनवरी 2013 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (20:50 तक), नक्षत्र हस्त (13:41 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 07:14 पर और सूर्यास्त 17:38 पर है। राहुकाल 09:50 से 11:08 तक है।

दिन और रात
दिन 07:14 – 17:38
रात 07:14 तक
तिथि
अष्टमी, 20:50 तक
नवमी
नक्षत्र
हस्त, 13:41 तक
चित्रा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 जनवरी 2013 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 20:50 तक
कृष्ण नवमी 19:11, 6 जन॰ तक
नक्षत्र
हस्त 13:41 तक
चित्रा 12:52, 6 जन॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 22:44 तक
सुकर्मा 20:09, 6 जन॰ तक
करण
बालव 09:27 तक
कौलव 20:50 तक
तैतिल 08:05, 6 जन॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 01:20, 6 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:14
सूर्यास्त
17:38
चंद्रोदय
00:09
चंद्रास्त
11:55
दिनमान
10h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:25 – 06:20
अभिजीत मुहूर्त
12:05 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
09:50 – 11:08
यमगंड
13:44 – 15:02
गुलिक काल
07:14 – 08:32

5 जनवरी 2013 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:14 – 08:32टालें
शुभ08:32 – 09:50शुभ
रोग09:50 – 11:08टालें
उद्वेग11:08 – 12:26टालें
चर12:26 – 13:44सामान्य
लाभ13:44 – 15:02शुभ
अमृत15:02 – 16:20शुभ
काल16:20 – 17:38टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:38 – 19:20शुभ
उद्वेग19:20 – 21:02टालें
शुभ21:02 – 22:44शुभ
अमृत22:44 – 00:26शुभ
चर00:26 – 02:08सामान्य
रोग02:08 – 03:50टालें
काल03:50 – 05:32टालें
लाभ05:32 – 07:14शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:1408:06दिन
गुरु08:0608:58दिन
मंगल08:5809:50दिन
सूर्य09:5010:42दिन
शुक्र10:4211:34दिन
बुध11:3412:26दिन
चंद्र12:2613:18दिन
शनि13:1814:10दिन
गुरु14:1015:02दिन
मंगल15:0215:54दिन
सूर्य15:5416:46दिन
शुक्र16:4617:38दिन
बुध17:3818:46रात
चंद्र18:4619:54रात
शनि19:5421:02रात
गुरु21:0222:10रात
मंगल22:1023:18रात
सूर्य23:1800:26रात
शुक्र00:2601:34रात
बुध01:3402:42रात
चंद्र02:4203:50रात
शनि03:5004:58रात
गुरु04:5806:06रात
मंगल06:0607:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 जन॰ 2013कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 जन॰ 2013कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 जन॰ 2013प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 जन॰ 2013पौष अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2013मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2013विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
22 जन॰ 2013शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 जन॰ 2013प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 जन॰ 2013पौष पूर्णिमापूर्णिमा
31 जन॰ 2013संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 फ़र॰ 2013कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0388° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।