17 मई 2013 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 17 मई 2013, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 17 मई 2013 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (21:28 तक), नक्षत्र आश्लेषा (03:35, 18 मई तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 19:06 पर है। राहुकाल 10:35 से 12:17 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 19:06
रात 05:28 तक
तिथि
सप्तमी, 21:28 तक
अष्टमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 03:35 तक
मघा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 मई 2013 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 21:28 तक
शुक्ल अष्टमी 22:29, 18 मई तक
नक्षत्र
आश्लेषा 03:35, 18 मई तक
मघा 05:04, 19 मई तक
योग
वृद्धि 15:57 तक
ध्रुव 15:54, 18 मई तक
करण
गर 08:43 तक
वणिज 21:28 तक
विष्टि (भद्रा) 10:04, 18 मई तक
चंद्र राशि
कर्क 03:35, 18 मई तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
19:06
चंद्रोदय
11:23
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
13h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2070
शक संवत
1935, विजय संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:06 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
10:35 – 12:17
यमगंड
15:41 – 17:23
गुलिक काल
07:11 – 08:53

17 मई 2013 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:29 – 07:11सामान्य
लाभ07:11 – 08:53शुभ
अमृत08:53 – 10:35शुभ
काल10:35 – 12:17टालें
शुभ12:17 – 13:59शुभ
रोग13:59 – 15:41टालें
उद्वेग15:41 – 17:23टालें
चर17:23 – 19:06सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:06 – 20:23टालें
काल20:23 – 21:41टालें
लाभ21:41 – 22:59शुभ
उद्वेग22:59 – 00:17टालें
शुभ00:17 – 01:35शुभ
अमृत01:35 – 02:53शुभ
चर02:53 – 04:10सामान्य
रोग04:10 – 05:28टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2906:37दिन
बुध06:3707:45दिन
चंद्र07:4508:53दिन
शनि08:5310:01दिन
गुरु10:0111:09दिन
मंगल11:0912:17दिन
सूर्य12:1713:25दिन
शुक्र13:2514:33दिन
बुध14:3315:41दिन
चंद्र15:4116:49दिन
शनि16:4917:57दिन
गुरु17:5719:06दिन
मंगल19:0619:57रात
सूर्य19:5720:49रात
शुक्र20:4921:41रात
बुध21:4122:33रात
चंद्र22:3323:25रात
शनि23:2500:17रात
गुरु00:1701:09रात
मंगल01:0902:01रात
सूर्य02:0102:53रात
शुक्र02:5303:45रात
बुध03:4504:36रात
चंद्र04:3605:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 मई 2013शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 मई 2013प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 मई 2013वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
28 मई 2013संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 जून 2013कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 जून 2013कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 जून 2013प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 जून 2013ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
12 जून 2013विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 जून 2013मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0439° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।