19 फ़रवरी 2014 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 19 फ़रवरी 2014, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 19 फ़रवरी 2014 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (11:23 तक), नक्षत्र हस्त (09:16 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:56 पर और सूर्यास्त 18:14 पर है। राहुकाल 12:35 से 13:59 तक है।

दिन और रात
दिन 06:56 – 18:14
रात 06:55 तक
तिथि
चतुर्थी, 11:23 तक
पंचमी
नक्षत्र
चित्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 फ़रवरी 2014 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 11:23 तक
कृष्ण पंचमी 11:54, 20 फ़र॰ तक
नक्षत्र
हस्त 09:16 तक
चित्रा 10:23, 20 फ़र॰ तक
योग
शूलअशुभ 09:49 तक
गंडअशुभ 09:06, 20 फ़र॰ तक
करण
बालव 11:23 तक
कौलव 23:42 तक
तैतिल 11:54, 20 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 21:53 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:56
सूर्यास्त
18:14
चंद्रोदय
22:14
चंद्रास्त
09:09
दिनमान
11h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2070
शक संवत
1935, विजय संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:14 – 06:05
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 12:57 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:35 – 13:59
यमगंड
08:21 – 09:45
गुलिक काल
11:10 – 12:35

19 फ़रवरी 2014 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:56 – 08:21शुभ
अमृत08:21 – 09:45शुभ
काल09:45 – 11:10टालें
शुभ11:10 – 12:35शुभ
रोग12:35 – 13:59टालें
उद्वेग13:59 – 15:24टालें
चर15:24 – 16:49सामान्य
लाभ16:49 – 18:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:14 – 19:49टालें
शुभ19:49 – 21:24शुभ
अमृत21:24 – 22:59शुभ
चर22:59 – 00:34सामान्य
रोग00:34 – 02:09टालें
काल02:09 – 03:45टालें
लाभ03:45 – 05:20शुभ
उद्वेग05:20 – 06:55टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:5607:52दिन
चंद्र07:5208:49दिन
शनि08:4909:45दिन
गुरु09:4510:42दिन
मंगल10:4211:38दिन
सूर्य11:3812:35दिन
शुक्र12:3513:31दिन
बुध13:3114:28दिन
चंद्र14:2815:24दिन
शनि15:2416:21दिन
गुरु16:2117:17दिन
मंगल17:1718:14दिन
सूर्य18:1419:17रात
शुक्र19:1720:20रात
बुध20:2021:24रात
चंद्र21:2422:27रात
शनि22:2723:31रात
गुरु23:3100:34रात
मंगल00:3401:38रात
सूर्य01:3802:41रात
शुक्र02:4103:45रात
बुध03:4504:48रात
चंद्र04:4805:51रात
शनि05:5106:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 फ़र॰ 2014संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 फ़र॰ 2014कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 फ़र॰ 2014कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 फ़र॰ 2014प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
1 मार्च 2014फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
4 मार्च 2014विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 मार्च 2014शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 मार्च 2014प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 मार्च 2014मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्च 2014फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
20 मार्च 2014संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0545° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।