8 जुलाई 2014 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 8 जुलाई 2014, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 8 जुलाई 2014 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (05:57 तक), नक्षत्र विशाखा (02:23, 9 जुल॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 19:22 पर है। राहुकाल 15:54 से 17:38 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 19:22
रात 05:30 तक
तिथि
एकादशी, 04:40 तक
नक्षत्र
विशाखा, 02:23 तक
अनुराधा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 जुलाई 2014 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल दशमी 05:57 तक
शुक्ल एकादशी 04:40, 9 जुल॰ तक
शुक्ल द्वादशी 02:35, 10 जुल॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 02:23, 9 जुल॰ तक
अनुराधा 01:10, 10 जुल॰ तक
योग
साध्य 22:14 तक
शुभ 19:42, 9 जुल॰ तक
करण
गर 05:57 तक
वणिज 17:24 तक
विष्टि (भद्रा) 04:40, 9 जुल॰ तक
बव 15:43, 9 जुल॰ तक
चंद्र राशि
तुला 20:35 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
19:22
चंद्रोदय
15:08
चंद्रास्त
01:31
दिनमान
13h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2071
शक संवत
1936, जय संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:08 – 04:49
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
15:54 – 17:38
यमगंड
08:57 – 10:42
गुलिक काल
12:26 – 14:10

8 जुलाई 2014 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:29 – 07:13टालें
उद्वेग07:13 – 08:57टालें
चर08:57 – 10:42सामान्य
लाभ10:42 – 12:26शुभ
अमृत12:26 – 14:10शुभ
काल14:10 – 15:54टालें
शुभ15:54 – 17:38शुभ
रोग17:38 – 19:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:22 – 20:38टालें
लाभ20:38 – 21:54शुभ
उद्वेग21:54 – 23:10टालें
शुभ23:10 – 00:26शुभ
अमृत00:26 – 01:42शुभ
चर01:42 – 02:58सामान्य
रोग02:58 – 04:14टालें
काल04:14 – 05:30टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:2906:39दिन
सूर्य06:3907:48दिन
शुक्र07:4808:57दिन
बुध08:5710:07दिन
चंद्र10:0711:16दिन
शनि11:1612:26दिन
गुरु12:2613:35दिन
मंगल13:3514:44दिन
सूर्य14:4415:54दिन
शुक्र15:5417:03दिन
बुध17:0318:13दिन
चंद्र18:1319:22दिन
शनि19:2220:13रात
गुरु20:1321:03रात
मंगल21:0321:54रात
सूर्य21:5422:45रात
शुक्र22:4523:35रात
बुध23:3500:26रात
चंद्र00:2601:16रात
शनि01:1602:07रात
गुरु02:0702:58रात
मंगल02:5803:48रात
सूर्य03:4804:39रात
शुक्र04:3905:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 जुल॰ 2014शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जुल॰ 2014प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 जुल॰ 2014आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
15 जुल॰ 2014संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 जुल॰ 2014कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुल॰ 2014कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 जुल॰ 2014कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 जुल॰ 2014प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जुल॰ 2014श्रावण अमावस्याअमावस्या
31 जुल॰ 2014विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0598° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।