29 अगस्त 2014 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 29 अगस्त 2014, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 29 अगस्त 2014 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (03:42, 30 अग॰ तक), नक्षत्र हस्त (13:50 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 18:46 पर है। राहुकाल 10:45 से 12:21 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 18:46
रात 05:58 तक
तिथि
चतुर्थी, 03:42 तक
पंचमी
नक्षत्र
हस्त, 13:50 तक
चित्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 अगस्त 2014 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 03:42, 30 अग॰ तक
शुक्ल पंचमी 04:46, 31 अग॰ तक
नक्षत्र
हस्त 13:50 तक
चित्रा 15:47, 30 अग॰ तक
योग
शुभ 16:30 तक
शुक्ल 16:32, 30 अग॰ तक
करण
वणिज 14:59 तक
विष्टि (भद्रा) 03:42, 30 अग॰ तक
बव 16:18, 30 अग॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 02:52, 30 अग॰ तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
18:46
चंद्रोदय
09:00
चंद्रास्त
20:49
दिनमान
12h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2071
शक संवत
1936, जय संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:28 – 05:12
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
10:45 – 12:21
यमगंड
15:34 – 17:10
गुलिक काल
07:33 – 09:09

29 अगस्त 2014 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:57 – 07:33सामान्य
लाभ07:33 – 09:09शुभ
अमृत09:09 – 10:45शुभ
काल10:45 – 12:21टालें
शुभ12:21 – 13:58शुभ
रोग13:58 – 15:34टालें
उद्वेग15:34 – 17:10टालें
चर17:10 – 18:46सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:46 – 20:10टालें
काल20:10 – 21:34टालें
लाभ21:34 – 22:58शुभ
उद्वेग22:58 – 00:22टालें
शुभ00:22 – 01:46शुभ
अमृत01:46 – 03:10शुभ
चर03:10 – 04:34सामान्य
रोग04:34 – 05:58टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5707:01दिन
बुध07:0108:05दिन
चंद्र08:0509:09दिन
शनि09:0910:13दिन
गुरु10:1311:17दिन
मंगल11:1712:21दिन
सूर्य12:2113:26दिन
शुक्र13:2614:30दिन
बुध14:3015:34दिन
चंद्र15:3416:38दिन
शनि16:3817:42दिन
गुरु17:4218:46दिन
मंगल18:4619:42रात
सूर्य19:4220:38रात
शुक्र20:3821:34रात
बुध21:3422:30रात
चंद्र22:3023:26रात
शनि23:2600:22रात
गुरु00:2201:18रात
मंगल01:1802:14रात
सूर्य02:1403:10रात
शुक्र03:1004:06रात
बुध04:0605:02रात
चंद्र05:0205:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 अग॰ 2014विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 सित॰ 2014शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 सित॰ 2014प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 सित॰ 2014भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
12 सित॰ 2014संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 सित॰ 2014कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 सित॰ 2014कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2014कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 सित॰ 2014प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 सित॰ 2014आश्विन अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0618° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।