2 फ़रवरी 2016 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2016, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2016 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (23:56 तक), नक्षत्र विशाखा (16:15 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 07:09 पर और सूर्यास्त 18:00 पर है। राहुकाल 15:17 से 16:39 तक है।

दिन और रात
दिन 07:09 – 18:00
रात 07:08 तक
तिथि
नवमी, 23:56 तक
दशमी
नक्षत्र
विशाखा, 16:15 तक
अनुराधा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 फ़रवरी 2016 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण नवमी 23:56 तक
कृष्ण दशमी 01:06, 4 फ़र॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 16:15 तक
अनुराधा 18:08, 3 फ़र॰ तक
योग
वृद्धि 00:13, 3 फ़र॰ तक
ध्रुव 23:59, 3 फ़र॰ तक
करण
तैतिल 11:05 तक
गर 23:56 तक
वणिज 12:37, 3 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
तुला 09:41 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:09
सूर्यास्त
18:00
चंद्रोदय
01:20
चंद्रास्त
12:37
दिनमान
10h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2072
शक संवत
1937, मन्मथ संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:23 – 06:16
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 12:56

अशुभ समय

राहुकाल
15:17 – 16:39
यमगंड
09:52 – 11:13
गुलिक काल
12:34 – 13:56

2 फ़रवरी 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:09 – 08:30टालें
उद्वेग08:30 – 09:52टालें
चर09:52 – 11:13सामान्य
लाभ11:13 – 12:34शुभ
अमृत12:34 – 13:56शुभ
काल13:56 – 15:17टालें
शुभ15:17 – 16:39शुभ
रोग16:39 – 18:00टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:00 – 19:39टालें
लाभ19:39 – 21:17शुभ
उद्वेग21:17 – 22:56टालें
शुभ22:56 – 00:34शुभ
अमृत00:34 – 02:13शुभ
चर02:13 – 03:51सामान्य
रोग03:51 – 05:30टालें
काल05:30 – 07:08टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:0908:03दिन
सूर्य08:0308:57दिन
शुक्र08:5709:52दिन
बुध09:5210:46दिन
चंद्र10:4611:40दिन
शनि11:4012:34दिन
गुरु12:3413:29दिन
मंगल13:2914:23दिन
सूर्य14:2315:17दिन
शुक्र15:1716:12दिन
बुध16:1217:06दिन
चंद्र17:0618:00दिन
शनि18:0019:06रात
गुरु19:0620:12रात
मंगल20:1221:17रात
सूर्य21:1722:23रात
शुक्र22:2323:28रात
बुध23:2800:34रात
चंद्र00:3401:40रात
शनि01:4002:45रात
गुरु02:4503:51रात
मंगल03:5104:57रात
सूर्य04:5706:02रात
शुक्र06:0207:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 फ़र॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 फ़र॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 फ़र॰ 2016माघ अमावस्याअमावस्या
12 फ़र॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2016कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
18 फ़र॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 फ़र॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 फ़र॰ 2016माघ पूर्णिमापूर्णिमा
26 फ़र॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 मार्च 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0818° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।