26 मार्च 2016 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 26 मार्च 2016, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 26 मार्च 2016 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (01:09, 27 मार्च तक), नक्षत्र स्वाति (04:12, 27 मार्च तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:18 पर और सूर्यास्त 18:35 पर है। राहुकाल 09:22 से 10:54 तक है।

दिन और रात
दिन 06:18 – 18:35
रात 06:16 तक
तिथि
तृतीया, 01:09 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
स्वाति, 04:12 तक
विशाखा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 मार्च 2016 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 01:09, 27 मार्च तक
कृष्ण चतुर्थी 03:34, 28 मार्च तक
नक्षत्र
स्वाति 04:12, 27 मार्च तक
विशाखा 07:05, 28 मार्च तक
योग
व्याघातअशुभ 10:50 तक
हर्षण 11:45, 27 मार्च तक
करण
वणिज 11:52 तक
विष्टि (भद्रा) 01:09, 27 मार्च तक
बव 14:23, 27 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:18
सूर्यास्त
18:35
चंद्रोदय
21:06
चंद्रास्त
07:56
दिनमान
12h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2072
शक संवत
1937, मन्मथ संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:44 – 05:31
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
09:22 – 10:54
यमगंड
13:59 – 15:31
गुलिक काल
06:18 – 07:50

26 मार्च 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:18 – 07:50टालें
शुभ07:50 – 09:22शुभ
रोग09:22 – 10:54टालें
उद्वेग10:54 – 12:26टालें
चर12:26 – 13:59सामान्य
लाभ13:59 – 15:31शुभ
अमृत15:31 – 17:03शुभ
काल17:03 – 18:35टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:35 – 20:03शुभ
उद्वेग20:03 – 21:31टालें
शुभ21:31 – 22:58शुभ
अमृत22:58 – 00:26शुभ
चर00:26 – 01:54सामान्य
रोग01:54 – 03:21टालें
काल03:21 – 04:49टालें
लाभ04:49 – 06:16शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:1807:19दिन
गुरु07:1908:21दिन
मंगल08:2109:22दिन
सूर्य09:2210:23दिन
शुक्र10:2311:25दिन
बुध11:2512:26दिन
चंद्र12:2613:28दिन
शनि13:2814:29दिन
गुरु14:2915:31दिन
मंगल15:3116:32दिन
सूर्य16:3217:34दिन
शुक्र17:3418:35दिन
बुध18:3519:34रात
चंद्र19:3420:32रात
शनि20:3221:31रात
गुरु21:3122:29रात
मंगल22:2923:27रात
सूर्य23:2700:26रात
शुक्र00:2601:24रात
बुध01:2402:23रात
चंद्र02:2303:21रात
शनि03:2104:20रात
गुरु04:2005:18रात
मंगल05:1806:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 मार्च 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अप्रैल 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 अप्रैल 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 अप्रैल 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अप्रैल 2016चैत्र अमावस्याअमावस्या
10 अप्रैल 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 अप्रैल 2016मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 अप्रैल 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अप्रैल 2016चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0838° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।