2 जुलाई 2016 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 2 जुलाई 2016, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 2 जुलाई 2016 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (21:33 तक), नक्षत्र रोहिणी (21:56 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 05:27 पर और सूर्यास्त 19:22 पर है। राहुकाल 08:56 से 10:40 तक है।

दिन और रात
दिन 05:27 – 19:22
रात 05:27 तक
तिथि
त्रयोदशी, 21:33 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
रोहिणी, 21:56 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 जुलाई 2016 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 21:33 तक
कृष्ण चतुर्दशी 18:53, 3 जुल॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 21:56 तक
मृगशिरा 20:05, 3 जुल॰ तक
योग
शूलअशुभ 05:46 तक
गंडअशुभ 02:25, 3 जुल॰ तक
वृद्धि 23:14, 3 जुल॰ तक
करण
गर 10:57 तक
वणिज 21:33 तक
विष्टि (भद्रा) 08:11, 3 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:27
सूर्यास्त
19:22
चंद्रोदय
03:24
चंद्रास्त
17:11
दिनमान
13h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:06 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
08:56 – 10:40
यमगंड
14:09 – 15:54
गुलिक काल
05:27 – 07:11

2 जुलाई 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:27 – 07:11टालें
शुभ07:11 – 08:56शुभ
रोग08:56 – 10:40टालें
उद्वेग10:40 – 12:25टालें
चर12:25 – 14:09सामान्य
लाभ14:09 – 15:54शुभ
अमृत15:54 – 17:38शुभ
काल17:38 – 19:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:22 – 20:38शुभ
उद्वेग20:38 – 21:54टालें
शुभ21:54 – 23:09शुभ
अमृत23:09 – 00:25शुभ
चर00:25 – 01:40सामान्य
रोग01:40 – 02:56टालें
काल02:56 – 04:12टालें
लाभ04:12 – 05:27शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:2706:37दिन
गुरु06:3707:46दिन
मंगल07:4608:56दिन
सूर्य08:5610:05दिन
शुक्र10:0511:15दिन
बुध11:1512:25दिन
चंद्र12:2513:34दिन
शनि13:3414:44दिन
गुरु14:4415:54दिन
मंगल15:5417:03दिन
सूर्य17:0318:13दिन
शुक्र18:1319:22दिन
बुध19:2220:13रात
चंद्र20:1321:03रात
शनि21:0321:54रात
गुरु21:5422:44रात
मंगल22:4423:34रात
सूर्य23:3400:25रात
शुक्र00:2501:15रात
बुध01:1502:06रात
चंद्र02:0602:56रात
शनि02:5603:46रात
गुरु03:4604:37रात
मंगल04:3705:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 जुल॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जुल॰ 2016आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
8 जुल॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 जुल॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 जुल॰ 2016कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
17 जुल॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 जुल॰ 2016आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
23 जुल॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 जुल॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0875° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।