1 नवंबर 2016 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 1 नवंबर 2016, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 1 नवंबर 2016 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (04:11, 2 नव॰ तक), नक्षत्र विशाखा (15:00 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:33 पर और सूर्यास्त 17:35 पर है। राहुकाल 14:50 से 16:13 तक है।

दिन और रात
दिन 06:33 – 17:35
रात 06:33 तक
तिथि
द्वितीया, 04:11 तक
तृतीया
नक्षत्र
विशाखा, 15:00 तक
अनुराधा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 नवंबर 2016 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 04:11, 2 नव॰ तक
शुक्ल तृतीया 06:37, 3 नव॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 15:00 तक
अनुराधा 17:57, 2 नव॰ तक
योग
सौभाग्य 23:46 तक
शोभन 00:36, 3 नव॰ तक
करण
बालव 14:55 तक
कौलव 04:11, 2 नव॰ तक
तैतिल 17:25, 2 नव॰ तक
चंद्र राशि
तुला 08:15 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:33
सूर्यास्त
17:35
चंद्रोदय
07:40
चंद्रास्त
18:54
दिनमान
11h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2073
शक संवत
1938, दुर्मुख संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
14:50 – 16:13
यमगंड
09:18 – 10:41
गुलिक काल
12:04 – 13:27

1 नवंबर 2016 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:33 – 07:56टालें
उद्वेग07:56 – 09:18टालें
चर09:18 – 10:41सामान्य
लाभ10:41 – 12:04शुभ
अमृत12:04 – 13:27शुभ
काल13:27 – 14:50टालें
शुभ14:50 – 16:13शुभ
रोग16:13 – 17:35टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:35 – 19:13टालें
लाभ19:13 – 20:50शुभ
उद्वेग20:50 – 22:27टालें
शुभ22:27 – 00:04शुभ
अमृत00:04 – 01:42शुभ
चर01:42 – 03:19सामान्य
रोग03:19 – 04:56टालें
काल04:56 – 06:33टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3307:28दिन
सूर्य07:2808:23दिन
शुक्र08:2309:18दिन
बुध09:1810:14दिन
चंद्र10:1411:09दिन
शनि11:0912:04दिन
गुरु12:0412:59दिन
मंगल12:5913:55दिन
सूर्य13:5514:50दिन
शुक्र14:5015:45दिन
बुध15:4516:40दिन
चंद्र16:4017:35दिन
शनि17:3518:40रात
गुरु18:4019:45रात
मंगल19:4520:50रात
सूर्य20:5021:55रात
शुक्र21:5523:00रात
बुध23:0000:04रात
चंद्र00:0401:09रात
शनि01:0902:14रात
गुरु02:1403:19रात
मंगल03:1904:24रात
सूर्य04:2405:29रात
शुक्र05:2906:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 नव॰ 2016विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 नव॰ 2016शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2016प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2016कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2016वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2016संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2016कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2016कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 नव॰ 2016प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 नव॰ 2016मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0922° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।